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सरकारी नीतियों को प्रभावित करने में कारगर है मीडिया
  • calendar_month 17,FEB 2022
सरकारी नीतियों को प्रभावित करने में कारगर है मीडिया

आधुनिक तकनीक से लैस आज की पत्रकारिता सरकारी नीतियों पर पहले से ज्यादा असर डाल रही है। यह असर बहुत तेज और बहुआयामी है। सोशल मीडिया, वेब जर्नलिज्म और न्यूज चैनलों ने अखबारों के साथ मिलकर सरकारी नीतिनिर्माताओं को आम नागरिक की आवाज सुनने पर मजबूर कर दिया है। यह विचारबिंदु आईआईटी कानपुर के `पॉलिसी कॉन्क्लेव-22` के एक वार्ता सत्र में रविवार सुबह 13 फ़रवरी को प्रस्तुत किया गया। संस्थान के `पब्लिक पॉलिसी एंड मीडिया सेल` द्वारा आयोजित इस वार्ता सत्र का विषय था - सरकारी नीतिनिर्धारण पर पत्रकारिता का असर। अमर उजाला के कार्यकारी संपादक और उत्तराखंड के स्टेट हैड संजय अभिज्ञान ने इस विषय पर अपना वक्तव्य छात्र-छात्राओं के सामने रखा।

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AUF नज़रिया | हौसलों की उड़ान | जीव बसेरा | राखी किशोर
  • calendar_month 28,MAR 2021
AUF नज़रिया | हौसलों की उड़ान | जीव बसेरा | राखी किशोर

नज़रिया श्रृंखला के तहत अमर उजाला फाउंडेशन पेश कर रहा है ऐसे लोगों की छोटी कहानियां जिनकी जिंदगी ने जमीनी हकीकत की स्लेट पर उनके हौसले से लिखा है उनका नज़रिया... ये बातें हैं उनकी जिन्होंने खुद को इतना समर्थ बनाया है कि अपने दम पर अपनी जिद और सपनों की मंजिल तय कर सकें। हालात का रोना रोने के बजाय अपनी सामर्थ्य भर खुद हालात बदलने की कोशिश करते चलें.. खुशियां बिखरते चलें..

मौजूदा समय में ज्यादातर लोग गली-मोहल्ले के कुत्तों से हैरान-परेशान हैं, कुछ तो आतंक का पर्याय देते हुए मारने से भी गुरेज नहीं करते और खुद को पशु प्रेमी कहते हैं। आवारा कुत्ते कहकर लोग इसे बड़ी चुनौती बताते हैं और भेदभाव करते हैं। अपने घर के पालतू जानवरों को तो लोग बहुत प्यार करते हैं, लेकिन सामुदायिक पशुओं के बारे में बहुत कम लोग सोच पाते हैं। एनिमल लवर एवं स्ट्रे डॉग्स की देखभाल की असली मसाल पेस कर रहा है लखनऊ के हसनगंज में स्थित जीव बसेरा..

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हिंदी हैं हम | आइए...मातृभाषा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के अभियान का हिस्सा बनें
  • calendar_month 02,AUG 2020
हिंदी हैं हम | आइए...मातृभाषा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के अभियान का हिस्सा बनें

मातृभाषा से दोस्ती एक कृतज्ञ समाज की जरूरत होती है और इसी कड़ी में अमर उजाला की तरफ से एक विनम्र कोशिश है 'हिंदी हैं हम'। मातृभाषा से दिल का रिश्ता हो तो हमारी संवेदनाओं को पंख मिलते हैं, सपनों को उड़ान मिलती है और हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मिलते हैं शब्द।

अपने विचारों, भावनाओं और संवेदनाओं को व्यक्त करने का सबसे सशक्त माध्यम मातृभाषा है। इसी के जरिये हम अपनी बात को सहजता और सुगमता से दूसरों तक पहुंचा पाते हैं। हिंदी की लोकप्रियता और पाठकों से उसके दिली रिश्तों को देखते हुए अमर उजाला ने ‘हिंदी हैं हम’ अभियान का शुभारंभ किया है। यह एक ऐसा मंच होगा, जिससे जुड़कर हमारे पाठक मातृभाषा को और समृद्धशाली बना सकते हैं।

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हिंदी हैं हम | अपनों की भाषा... सपनों की भाषा | हिंदी पढ़े | हिंदी बोलें | हिंदी सीखें | गर्व करें
  • calendar_month 01,AUG 2020
हिंदी हैं हम | अपनों की भाषा... सपनों की भाषा | हिंदी पढ़े | हिंदी बोलें | हिंदी सीखें | गर्व करें

मातृभाषा से दोस्ती एक कृतज्ञ समाज की जरूरत होती है और इसी कड़ी में अमर उजाला की तरफ से एक विनम्र कोशिश है 'हिंदी हैं हम'। मातृभाषा से दिल का रिश्ता हो तो हमारी संवेदनाओं को पंख मिलते हैं, सपनों को उड़ान मिलती है और हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए मिलते हैं शब्द।

अमर उजाला के पाठकों के लिए 'हिंदी हैं हम' एक ऐसा मंच है, जहां हम सब मिलकर लिख सकते हैं उम्मीद की एक नई वर्णमाला। इससे जुड़कर आप अपनी मातृभाषा से प्रेम का परिचय दे सकते हैं, अपने शब्द सामर्थ्य से सबका दिल जीत सकते हैं। इसका हिस्सा बनने के लिए आपको बस 30 सेकंड का अपना वीडियो रिकॉर्ड करके भेजना है।

इस अभियान में बच्चे जुड़ सकते हैं, युवा भी हिस्सा ले सकते हैं। दादा-दादियों और नाना-नानियों का भी स्वागत है। बड़ों की मदद से बच्चे रिकॉर्डिंग करें और अपने दादा-दादी या नाना-नानी की मदद भी करें। ये वीडियो आप हमारे व्हाट्सएप नंबर पर भेजें (9711616205) या ऑनलाइन अपलोड करें। हर वर्ग में हर हफ्ते प्रमाणपत्र और किताबों सहित उपहार घोषित होंगे। श्रृंखला पूरे छह सप्ताह चलेगी। चुने हुए प्रतिभागियों को हिंदी माह सितंबर के दौरान मातृभाषा पर विशेष वेबिनार में हिस्सा लेने का मौका मिलेगा और वे अमर उजाला अभियान के विशेष साथी नामित होंगे।

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नज़रिया- जो जीवन बदल दे | चंडीगढ़ | अमर उजाला फाउंडेशन
  • calendar_month 12,SEP 2019
नज़रिया- जो जीवन बदल दे | चंडीगढ़ | अमर उजाला फाउंडेशन

अमर उजाला आपके लिए लेकर आया है "नज़रिया- जो जीवन बदल दे" विचारो को उत्तेजित करने वाली वार्ताओं की एक श्रृंखला , उन लोगो द्वारा जो अपने विचारों द्वारा समाज में परिवर्तन लाए हैं। संवाद के इस कार्यक्रम में आपसे रू-ब-रू होंगे विचार नायक, खुद अपनी लीक और कर्म बनाने वाले विशेषज्ञ जो आपकी ज़िन्दगी को बहुत गहराई से परिभाषित करने वाले मुद्दों पर अपनी अनुभव-पुष्ट बात बेबाकी से प्रस्तुत करेंगे । नजरिया का तीसरा संस्करण मंगलवार, 17 सितंबर, 2019, दोपहर 3.30 बजे से भार्गव ऑडिटोरियम, पीजीआई, सेक्टर 12, चंडीगढ़ में आयोजित किया जाएगा।

Amar ujala Foundation brings to you "Nazariya Jo Jeevan Badal De" a series of thought provoking talks by people who have brought about change though the power of ideas and action. These talks will bring together thought leaders, idea mavens and youth icons under one roof to do a deep exploration at the most important ideas of today. The third edition of this series shall be hosted on Tuesday, September 17, 2019, 3.30 pm onwards, Bhargava Auditorium, PGI, Sector 12, Chandigarh.

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नज़रिया | इसरो के बेजोड़ मिशन: बीते कल और आने वाले कल की झलक | अमर उजाला फाउंडेशन
  • calendar_month 10,AUG 2018
नज़रिया | इसरो के बेजोड़ मिशन: बीते कल और आने वाले कल की झलक | अमर उजाला फाउंडेशन

भारत के खास अंतरिक्ष मिशनों की याद दिलाते हुए इसरो के वरिष्ठ वैज्ञानिक इम्तियाज़ अली खान ने आने वाले दिनों में इसरो के बेजोड़ मिशनों की विशेषताओं को बताया। पांच देशों के पे-लोड ले जाने वाले चंद्रयान मिशन और चन्द्रमा पर रोवर उतार कर शोध करने की तैयारी की चर्चा की। स्पेस माइनिंग से प्लैटिनम (सोने से भी महंगी धातु) और हीलियम के खनन की संभावनाओं और स्पेस टूरिज्म की अंतरिक्षी उड़ान की जानकरी दी, 26 मई, 2018 को नई दिल्ली के इंडिया इस्लामिक सेंटर में आयोजित अमर उजाला फाउंडेशन के खास कार्यक्रम ‘नज़रिया- जो जीवन बदल दे’ में।

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