अमर उजाला फाउंडेशन और विकलांग सहायता संस्था की ओर से रविवार, 22 दिसम्बर, 2019 को आगरा में डोरीलाल अग्रवाल राष्ट्रीय मेधावी दिव्यांग छात्रवृत्ति- 2019 सम्मान समारोह का आयोजन सादगीपूर्ण ढंग से अमर उजाला कार्यालय में किया गया। इसमें देश भर से आए 150 दिव्यांग मेधावियों को छात्रवृत्ति प्रदान की गई, ताकि आर्थिक तंगी उनकी राह में बाधा न बने। अतिथियों ने उन्हें शील्ड प्रदान कर सम्मानित किया।
प्रदेश की कानून व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए आयोजन को स्थगित कर दिया था, लेकिन दिव्यांग मेधावियों में से 150 आगरा आ गए थे। इस कारण अमर उजाला कार्यालय में सादे समारोह में उन्हें छात्रवृत्ति प्रदान की गई। ये मेधावी हैदराबाद, चेन्नई, आजमगढ़ समेत 13 राज्यों के 108 जिलों से आए। समारोह में भाग लेने के लिए उत्साह इतना था कि चार दिव्यांग व्हील चेयर पर आए।
इन 150 मेधावियों में वर्ष 2018 के 56 लाभार्थी और इस साल लाभ पाने वाले 94 मेधावी रहे। इनको कुल 22,58,400 रुपये की छात्रवृत्ति के चेक दिए गए। यह छात्र स्नातक, बीटेक, बीसीए, एमसीए, एमबीए, एमबीबीएस, इंजीनियरिंग, विधि समेत अन्य कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें इंजीनियरिंग के 15, पीएचडी के छह और एमबीबीएस करने वाले चार मेधावी हैं। मुख्य अतिथि स्वतंत्रता सेनानी रानी सरोज गौरिहार और विशिष्ट अतिथि रामशरण मित्तल ने मेधावियों बधाई देते हुए संस्था के कार्यों की सराहना की।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. एमसी गुप्ता ने की। संचालन वेदप्रकाश शर्मा और डॉ. संजय बंसल ने किया। इन सभी को कार्यालय तक आने और वापसी का खर्च देने के साथ ठहरने और भोजन की व्यवस्था भी फाउंडेशन की ओर से की गई। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा का वीडियो प्रसारित किया गया। इसमें उन्होंने मेधावियों को हार न मानने का संदेश देते हुए बधाई दी। कार्यक्रम में डॉ. ज्ञानप्रकाश, डॉ. भूपेंद्र आहूजा, शांतिस्वरूप मोहन, केके पालीवाल, मौलाना उजैर आलम, मौलाना मोहम्मद शमीम, चंद्रमोहन अग्रवाल, विवेक मोहन, मुकेश जैन, डॉ. नवीन गुप्ता, डॉ. अंजू जैन, डॉ. हृदेश चौधरी, पवन आगरी, आनंद अग्रवाल, गौतम सेठ, पुष्पा श्रीवास्तव, निखिल कुमार, खुशबू शर्मा, काजल कुमारी, अनुराग, हरदेव गोस्वामी, शैलेंद्र नरवार, प्रांशु अग्रवाल, महेश शर्मा आदि मौजूद रहे।
छात्रवृत्ति से पूरी हो रही पीएचडी की पढ़ाई : अमर खान
हरदोई के अमर खान छात्रवृत्ति पा चुके हैं। बोले कि पिता हसरुद्दीन खान के पास मामूली खेती है। साल में 50-60 हजार रुपये ही कमा पाते हैं। चार भाई-बहन हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा का सपना इस छात्रवृत्ति से पूरा हो सकेगा।
गरीबी में फाउंडेशन ही एकमात्र उम्मीद : बलविंदर सिंह
बिजनौर के बलविंदर एमसीए कर रहे हैं। बोले कि उच्च शिक्षा पाने की राह में गरीबी रोड़ा बनी थी, लेकिन अमर उजाला फाउंडेशन से छात्रवृत्ति मिली तो आस बंधी। उन्होंने बताया कि परिवार में चार बहन भी हैं, पिता पर थोड़ी खेती है, जिससे बमुश्किल घर चल पाता है।
पूरा होगा डॉक्टर बनने का सपना : विशाल वर्मा
वाराणसी के विशाल वर्मा एमबीबीएस कर रहे हैं। पिता मदन प्रसाद वर्मा खेतीबाड़ी कर परिवार चलाते हैं। उच्च शिक्षा के लिए फीस जुटाना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि इन हालात में इस छात्रवृत्ति योजना से ही डॉक्टर बनने का सपना पूरा होगा।
विधि की पढ़ाई में छात्रवृत्ति से मिली राहत : मोहम्मद हसन
जौनपुर के मोहम्मद हसन बीएएलएलबी कर रहे हैं। हसन ने बताया कि पिता रिजवान अब्बास पर थोड़ी जमीन है, जिसमें खेती कर परिवार चलाते हैं। तीन भाई-बहन हैं, इनकी पढ़ाई के लिए फीस जुटाना मुश्किल है। फाउंडेशन की छात्रवृत्ति से राहत मिली है।

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन और श्री बाबा लालजी सेवा ट्रस्ट व पीसीएसएस की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। 53 लोगों ने अपनी सेहत की जांच कराई। यहां बीपी, शुगर, एसपीओटू, वजन और आंखों की जांचें की गईं। अधिकतर रोगी जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर आए। शिविर में रामा हॉस्पिटल के अलावा अशोक कपूर, राजेश सच्चर, राजू वालिया, पवन त्रिवेदी, रमेश मिश्रा, पंकज निषाद, इंद्रपाल सिंह सिमर, अखिल, रिजवान, डॉ. कविता आदि मौजूद रहे।

हाथरस। मेंडू रोड स्थित माया इंस्टीट्यूट में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत एक दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य प्रशिक्षक सिहान एमएस समुराई ने छात्राओं से कहा कि जब कोई सड़क पर परेशान करे तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे मुंह तोड़ जवाब दें। इसके लिए खुद की रक्षा करना सीखें।
उन्होंने कहा कि छेड़खानी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अपराधी अक्सर लड़कियों को सॉफ्ट टारगेट (कमजोर) मानकर निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मार्शल आर्ट एक शानदार और बेहद असरदार कला है। इसे सीखकर महिलाएं न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि अपनी रक्षा भी खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को पंच, किक और ब्लॉकिंग के व्यावहारिक दांव-पेच सिखाए। बताया कि अगर कोई अचानक हमला कर दे, तो बैग में मौजूद पेन या पिन भी एक हथियार बन सकता है। इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने की अपील की। वुमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्प डेस्क 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डायल 112 के प्रयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला, श्वेता सेंगर, निर्मल, चेष्ठा दीक्षित, नेहा सिंह, कल्पना निगम, साक्षी दीक्षित, खुशी सिंह, संघमित्रा, बीनेश, अजय वीर सिंह और भरत कुमार मौजूद रहे।

इगलास। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले इगलास सीएचसी में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में 28 लोगों ने रक्तदान कर लोगों को जागरूक किया। शिविर का शुभारंभ अधीक्षक डॉ. ज्योति शर्मा व सीएचसी बेसवां के अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। कस्बे के डॉक्टर, पुलिस कर्मियों के साथ अन्य लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले गौरव शर्मा, देवराज, अभिषेक, योगेंद्र नगाइच, मोहित बंसल, संतोष अग्रवाल, सोनू, प्रवीण प्रकाश गौड़, गोपाल कृष्ण, डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, शिवप्रकाश गौड़, लव कुमार चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश, राजकिशोर उपाध्याय, ललित कुमार, डॉ. बहादुर सिंह, अर्जुन, डॉ. मनोज चतुर्वेदी, विशाल उपाध्याय, विक्रमजीत, भारती सक्सेना, व्यवसायी प्रमोद अग्रवाल, तारावती अग्रवाल व अन्य थे। शिविर में रक्त संग्रह के लिए मलखान सिंह से डॉ. नूरा, अक्षय कुमार सेंगर, शुभम, प्रीति, अरविंद, नितिन व प्रीतम शामिल रहे।

सहपऊ। गांव समदपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 बच्चों की सेहत जांची गई। बच्चों की उम्र एवं लंबाई के अनुसार वजन, आंख, नाक-कान, गला, हृदय की धड़कन एवं पल्स रेट की जांच की गई। सभी बच्चे स्वस्थ मिले। इस दौरान डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजेश, डॉ. आशा मितरा, डॉ. नीलम, रजनी, आंगनबाड़ी केंद्र से मधुर, विवेक एवं सुमन मौजूद रहीं।

चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।