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अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति से अरुण और मनी के सपनों को मिली उड़ान

  • calendar_month 17,DEC 2019
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति से अरुण और मनी के सपनों को मिली उड़ान

प्रतिभा को मौका चाहिए मुकाम हासिल करने के लिए। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा ने वह मुकाम जम्मू के अरुण व कठुआ की मनी देवी को सुलभ कराया है। छात्रवृत्ति परीक्षा पास करने के बाद इन दोनों बच्चों के हौसलों की उड़ान और मजबूत हुई है। दोनों प्रतिभावान बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर पारिवार से आते हैं। परंतु अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा का परिणाम उनके लिए नया हौसला लेकर आया है। इसे हासिल करने के बाद इनके सपने आसानी से साकार होंगे।

अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा जिन्होंने पास की है उसमें जम्मू के चकराली गांव, घौ मन्हासां के बॉर्डर के नजदीक रहने वाले अरुण जीत सिंह भी शामिल हैं। अरुण का कहना है कि उन्हें बेहद खुशी है कि इस परीक्षा में उन्हें सफलता मिली और पूरे गांव में उनके माता-पिता का नाम रोशन हुआ। इसकी बदौलत अब वह अपने सपने को साकार करेंगे और उनका सपना है आईएएस अफसर बनने का।

उनका कहना है इस छात्रवृत्ति के मिलने से उनकी पढ़ाई को लेकर उनके माता-पिता पर किसी तरह का कोई दबाव नहीं रहेगा। अरुण का कहना है वह देश की सेवा करना चाहते हैं और दूसरों की मदद करने के लिए सदा आगे रहना चाहते हैं। अरुण इस समय गवर्नमेंट स्कूल चकराली में 10वीं कक्षा के विद्यार्थी हैं। उनके पिता किसान हैं और खेती से परिवार का गुजारा होता है। उनकी मां गृहणी हैं और अरुण का एक छोटा भाई और एक बड़ी बहन है।

सैन्य अधिकारी बनकर करूंगी देश सेवा : मनी
कठुआ के दूर दराज बौड़ा गांव सुविधाओं के नजरिए से पिछड़ा ही कहलाएगा, परंतु वहां की होनहार बेटी मनी देवी ने सभी दुश्वारियों को पीछे छोड़ते हुए अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा पास कर अपने सपनों को साकार करने के लिए मजबूत आधार तैयार कर लिया है। बड़ा होकर उसका सपना सैन्य अधिकारी बनने का है। मनी ने दसवीं की परीक्षा में 97.4 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं।

प्रतिभा संपन्न मनी देवी के पिता हॉकर हैं और पूरे परिवार के लिए वही आय का श्रोत हैं। उन्होंने जब बिटिया में प्रतिभा देखी तो गांव से निकलकर शहर में बसने का फैसला किया। पिछले कुछ वर्षों से मनी देवी अपने परिवार के साथ खरोट मोड के नजदीक एक किराए के मकान में रह रहे हैं।

मनी देवी ने बताया कि बचपन से ही उनका सपना सैन्य अधिकारी बनने का है। वो मिसाल कायम करना चाहती हैं। उनकी शिक्षा के पीछे पिता का भरपूर सहयोग रहा है। उनके परिवार में पिता के अलावा मां, एक भाई और बहन हैं।

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