गांव वालों के तानों और घर वालों के शुरुआती विरोध के बावजूद सरिता ने अपना बाल विवाह रुकवा लिया और पढ़ाई रुकने न दी। बी.ए. अंतिम वर्ष में पढ़ रही सरिता ने विरोध न किया होता तो उसकी शादी 9वीं क्लास में ही हो गयी होती।
तीन बड़े भाइयों-भाभियों वाले खासे बड़े परिवार में सरिता ने जब पढ़ाई के लिए अपना बाल विवाह रुकवाने की जिद ठानी तो शुरू में परिवार के सभी लोग नाराज हो गये। श्रावस्ती जिले के डौराबोझी गांव की सरिता ने बिना घबराये अपनी बात कहना जारी रखा और पढ़-लिख कर अपने पैरों पर खड़े होने के बाद ही शादी करने की जिद दोहराती रही। आखिरकार घर वालों को उसकी बात के गंभीर मायने समझ में आये और यों उसके आगे बढ़ने के सफर पर लगने वाला पूर्णविराम हट गया। फिर भी, जब सरिता विद्यालय जाने के लिए घर से निकलती थी तो गली-गांव के लोगों के दबी जुबान के ताने तो पीठ पीछे सुनने को मिलते ही थे। उनकी परवाह किये बगैर वह बढ़ती गयी। प्राथमिक स्कूल में शिक्षिका बनने का सपना संजोये सरिता बी.ए. की पढ़ाई पूरी करने में जुटी है।
स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी रानू देवी ने सरिता से बात करके यह वीडियो कथा बनाई है।
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हिंदी हैं हम अभियान के तहत अमर उजाला लघु फिल्म प्रतियोगिता में पुरस्कृत फिल्मों का प्रीमियर आज यानी 3 अप्रैल, रविवार को विजेताओं के सम्मान समारोह के साथ हो रहा है।
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केदारनाथ की त्रासदी के बाद उत्तराखंड की बांदलघाटी के आठ गाँवों की फिर से उठ खड़े होने की कहानी। अमर उजाला फाउंडेशन ने ग्रामीणों को साथ लेकर इनकी ज़िंदगी में रंग भरने की कोशिश की। स्टील के पुल, आवास, खेती-किसानी की ट्रेनिंग, युवाओं को रोजगार और बच्चों को शिक्षा से खींचा गया तरक्की का खाका। आज इन गाँवों की अलग पहचान है।
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आधुनिक तकनीक से लैस आज की पत्रकारिता सरकारी नीतियों पर पहले से ज्यादा असर डाल रही है। यह असर बहुत तेज और बहुआयामी है। सोशल मीडिया, वेब जर्नलिज्म और न्यूज चैनलों ने अखबारों के साथ मिलकर सरकारी नीतिनिर्माताओं को आम नागरिक की आवाज सुनने पर मजबूर कर दिया है। यह विचारबिंदु आईआईटी कानपुर के `पॉलिसी कॉन्क्लेव-22` के एक वार्ता सत्र में रविवार सुबह 13 फ़रवरी को प्रस्तुत किया गया। संस्थान के `पब्लिक पॉलिसी एंड मीडिया सेल` द्वारा आयोजित इस वार्ता सत्र का विषय था - सरकारी नीतिनिर्धारण पर पत्रकारिता का असर। अमर उजाला के कार्यकारी संपादक और उत्तराखंड के स्टेट हैड संजय अभिज्ञान ने इस विषय पर अपना वक्तव्य छात्र-छात्राओं के सामने रखा।
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कोरोना महामारी के साथ अफवाह का वायरस भी तेजी से फैल रहा है। कोरोना की लड़ाई में भले ही टीकाकरण को प्रमुख हथियार माना जा रहा है, लेकिन दूरदराज के इलाकों में फैली अफवाहों से अभियान कमजोर पड़ रहा है।
संकट के इस दौर से निकलने और महामारी से बचने का एकमात्र उपाय है कोविड प्रोटोकॉल का पालन और टीकाकरण। अमर उजाला फाउंडेशन समाज के सभी वर्ग के लोगों से टीकाकरण कराने की अपील करता है। कोरोना जागरूकता अभियान : मिलकर लड़ेंगे कोरोना से जंग- वैक्सीन के संग।
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अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मंगलवार, 8 जून, 2021 को कोरोना जागरूकता अभियान के तहत आयोजित लाइव कार्यक्रम में ग्रेटर नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुनील बालियान ने बताया कि टीका लगवाने के बाद किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। टीकाकरण के बाद भी कितनी सावधानी जरूरी है। टीका लगवाने के बाद क्या दिक्कत होती है। अगर तबीयत बिगड़ रही है, तो क्या करना चाहिए। इस दौरान डॉ. बालियान ने लोगों के सवालों का भी जवाब दिया।