Home Videos बड़े परिवार से भी जीती अकेली शिवानी की जिद, जारी है पढ़ाई | बड़े बदलाव की छोटी कहानियां

बड़े परिवार से भी जीती अकेली शिवानी की जिद, जारी है पढ़ाई | बड़े बदलाव की छोटी कहानियां

  • calendar_month 24,NOV 2018

दादा-दादी, मां-पिता और दो भाइयों वाले परिवार की सदस्या शिवानी अभी 13-14 साल की ही थी कि घर में उसकी शादी की चर्चा गरमाने लगी। यही चलन था उसके गांव का। लेकिन शिवानी के सपने अलग थे और अलग ही थी उसकी जिद। शुरू में बड़े-बुजुर्गों ने उसकी कुछ न सुनी लेकिन शिवानी भी अड़ गयी कि अभी मुझे और पढ़ाई करनी है, शादी अभी नहीं। आखिरकार मां के समझ जाने के बाद धीरे-धीरे सभी लोग राजी हो गये और आज 11वीं में पढ़ रही 18 साल की शिवानी पुलिस सेवा में जाने का सपना संजोए आगे बढ़ रही है।

शिवानी बताती है कि उसके स्कूल में भी इस बात को बार बार बताया गया था कि कच्ची उम्र में शादी हो जाए तो लड़की की सेहत और मानसिकता, दोनों ही कमजोर रह जाते हैं और जीवन भर तकलीफें झेलनी पड़ती हैं। यह समझाइश शिवानी के दिलो-दिमाग में गहरे उतर गयी और उसने ठान लिया था कि बिना कुछ हासिल किये वह शादी के लिए हर्गिज तैयार न होगी। श्रावस्ती के गिलौला ब्लॉक के रानीपुर काजी गांव के इस बड़े परिवार में भी शिवानी की छोटी जिद ने अपने लिए जगह बना ही ली।

स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी वंदना सिंह ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।

अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

शिवानी बताती है कि उसके स्कूल में भी इस बात को बार बार बताया गया था कि कच्ची उम्र में शादी हो जाए तो लड़की की सेहत और मानसिकता, दोनों ही कमजोर रह जाते हैं और जीवन भर तकलीफें झेलनी पड़ती हैं। यह समझाइश शिवानी के दिलो-दिमाग में गहरे उतर गयी और उसने ठान लिया था कि बिना कुछ हासिल किये वह शादी के लिए हर्गिज तैयार न होगी। श्रावस्ती के गिलौला ब्लॉक के रानीपुर काजी गांव के इस बड़े परिवार में भी शिवानी की छोटी जिद ने अपने लिए जगह बना ही ली।

स्मार्ट बेटियां अभियान से जुड़ी इंटरनेट साथी वंदना सिंह ने यह वीडियो कथा बनाकर अमर उजाला को भेजी है।

अमर उजाला फाउंडेशन, यूनिसेफ, फ्रेंड, फिया फाउंडेशन और जे.एम.सी. के साझा  अभियान स्मार्ट बेटियां के तहत श्रावस्ती और बलरामपुर जिले की 150 किशोरियों-लड़कियों को अपने मोबाइल फोन से बाल विवाह के खिलाफ काम करने वालों की ऐसी ही सच्ची और प्रेरक कहानियां बनाने का संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया गया है। इन स्मार्ट बेटियों की भेजी कहानियों को ही हम यहां आपके सामने पेश कर रहे हैं।

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