अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से शनिवार, 26 दिसम्बर, 2015 को हिसार के सूर्य नगर फाटक के पास स्थित होली चाइल्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गयाl पाठशाला में तीन सौ से अधिक छात्र-छात्राओं से रु-ब-रु हुए सीन ऑफ क्राइम हिसार रेंज के सहायक निदेशक डॉ. अजय कुमार व मानवाधिकार आयोग से पुरस्कृत एएसआई सज्जन कुमार ने विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी दी, वहीं नारी जाति का सम्मान करने की अपील की।
अंकों की चिंता और करियर की दौड़ में हमारी मानवीय संवेदनाएं खत्म होती जा रही हैं। समाज में कई प्रतिष्ठित व्यक्ति होते हैं, लेकिन अधिकांश में संवेदनाओं का अभाव है। ऐसे में व्यक्ति ही व्यक्ति का दर्द नहीं समझ रहा है और समाज संवेदन शून्य हो जाता है। सच तो यह है कि नौकरी पैकेज के उधेड़बुन में मानवीय संवेदनाओं ने दम तोड़ दिया है। उच्च डिग्रीधारी तो लाखों हैं, लेकिन इंसानियत का धर्म कुछ ही निभा रहे हैं। इसलिए शिक्षण संस्थाओं की महती जिम्मेदारी बनती है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा के साथ संस्कार व संवेदनाओं का पाठ भी पढ़ाएं, ताकि सड़क पर घायल पड़े व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया सके। शोषण और अन्याय के प्रति आवाज उठाई जा सके।
पुलिस की पाठशाला में बच्चों को समझाया गया कि हेलमेट को भार नहीं समझें। अमूमन चालान से बचने के लिए लोग हेलमेट पहनते हैं, यह मानसिकता ठीक नहीं। सड़क दुर्घटनाओं में 80 फीसदी मौत सिर की चोट के कारण होती है। यदि वाहन चालक हेलमेट पहनें तो 80 फीसदी मौतें रोकी जा सकती हैं। पुलिस की पाठशाला को लेकर विद्यार्थियों में उत्साह दिखा, वहीं उत्सुकता भी नजर आई। पुलिस से सीधे रूबरू होने और अपनी जिज्ञासाओं को शांत करने के लिए विद्यार्थियों ने अमर उजाला और पुलिस महकमे को थैंक्स कहा। बच्चों ने बताया कि एक ओर जहां कानून की जानकारी और कानूनी अधिकारों का पता चला। वहीं पुलिस के प्रति उनकी सोच भी बदली।
इस मौके पर छात्र-छात्राओं ने खुलकर पुलिस अधिकारियों से कई सवाल पूछे। साथ ही शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर अपने सुझाव भी दिए। बच्चों को नशे से दूर रहने और कन्या भ्रूण हत्या नहीं करने का संकल्प दिलाया गया। स्कूल निदेशक राजपाल सिंह सिंधू ने भी अपने विचार रखते हुए डॉ. अजय कुमार व सज्जन कुमार को सम्मानित किया। कार्यक्रम में आईजी पीआरओ दिनेश भी मौजूद रहे।
पाठशाला में हर छात्र-छात्रा अपने प्रश्न पूछने को लेकर उत्साहित नजर आया। प्रश्नों के साथ विद्यार्थियों ने समस्याओं के समाधान के लिए सुझाव भी दिए। हालांकि समयाभाव के कारण हर छात्र को प्रश्न पूछने का मौका नहीं मिल सका। इस पर एएसआई सज्जन कुमार ने विद्यार्थियों को अपना मोबाइल नंबर दिया, जिस पर छात्र मैसेज कर प्रश्न पूछ सकते हैं। श्रेष्ठ प्रश्नकर्ता विद्यार्थी को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से सम्मानित किया गया। अच्छे वातावरण के लिए जैसा हम चाहते हैं उसकी शुरुआत खुद से करनी होगी। सुधार का रास्ता दूसरों से नहीं स्वयं से शुरू होता है। जब हर व्यक्ति यह प्रण ले ले तो समाज स्वत: ही सुधर जाएगा। इसलिए हर व्यक्ति को स्वयं को एक उदाहरण के तौर पर प्रस्तुत करना होगा। ऐसे में बच्चे जागरूक हो जाएं तो अभिभावक भी जागरूक हो जाएंगे।
भयमुक्त वातावरण में सबका सहयोग जरूरी
पुलिस की पाठशाला में बच्चों को बताया गया कि अपराध मुक्त और भयमुक्त वातावरण निर्माण के लिए सबका सहयोग जरूरी होता है। यदि स्वयं कानून की पालना करेंगे, ट्रैफिक नियमों को नहीं तोड़ेंगे और एक दूसरे का सम्मान करेंगे तो समाज में अपराध नहीं होंगे और भयमुक्त वातावरण का निर्माण होगा।
सड़कों पर शिष्टाचार का अभाव
डॉ. अजय कुमार ने कहा कि सड़कों पर शिष्टाचार का अभाव है। नतीजतन भारत में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। उन्होंने बताया कि विश्व के कुल वाहनों में से महज एक फीसदी वाहन ही भारत में है, लेकिन सड़क दुर्घटनाएं दस फीसदी से अधिक हैं। इससे पता चलता है कि सड़क पर चलने में हम कितनी लापरवाही बरतते हैं। लापरवाही के साथ-साथ ईगो के साथ भी ड्राइव करते हैं। बड़े वाहनों की तरह साइकिल चलाने के लिए हेलमेट जरूरी कर दिया जाए तो अच्छा रहेगा। इससे हेलमेट पहनने की शुरू से ही आदत हो जाएगी।
यह दी सीख:
- नशा से दूर रहें और इस पर चिंतन करें
- तेज गति में बाइक नहीं चलाएं
- लड़कियों के साथ छेड़छाड़ नहीं करें
- गलत जगह वाहन पार्क नहीं करें
- स्पीड लिमिट का फॉलोअप करें
- हेलमेट पहनकर ही वाहन चलाएं
- सेफ्टी बेल्ट का सदैव उपयोग करें
यह हैं मानवीय मूल्य:
- संस्कार
- परोपकार
- भलाई
- ईमानदारी
- अनुशासन
- अच्छी संगत
- सम्मान और सहयोग
- संवेदना

हाथरस। मेंडू रोड स्थित माया इंस्टीट्यूट में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत एक दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य प्रशिक्षक सिहान एमएस समुराई ने छात्राओं से कहा कि जब कोई सड़क पर परेशान करे तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे मुंह तोड़ जवाब दें। इसके लिए खुद की रक्षा करना सीखें।
उन्होंने कहा कि छेड़खानी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अपराधी अक्सर लड़कियों को सॉफ्ट टारगेट (कमजोर) मानकर निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मार्शल आर्ट एक शानदार और बेहद असरदार कला है। इसे सीखकर महिलाएं न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि अपनी रक्षा भी खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को पंच, किक और ब्लॉकिंग के व्यावहारिक दांव-पेच सिखाए। बताया कि अगर कोई अचानक हमला कर दे, तो बैग में मौजूद पेन या पिन भी एक हथियार बन सकता है। इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने की अपील की। वुमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्प डेस्क 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डायल 112 के प्रयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला, श्वेता सेंगर, निर्मल, चेष्ठा दीक्षित, नेहा सिंह, कल्पना निगम, साक्षी दीक्षित, खुशी सिंह, संघमित्रा, बीनेश, अजय वीर सिंह और भरत कुमार मौजूद रहे।

इगलास। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले इगलास सीएचसी में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में 28 लोगों ने रक्तदान कर लोगों को जागरूक किया। शिविर का शुभारंभ अधीक्षक डॉ. ज्योति शर्मा व सीएचसी बेसवां के अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। कस्बे के डॉक्टर, पुलिस कर्मियों के साथ अन्य लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले गौरव शर्मा, देवराज, अभिषेक, योगेंद्र नगाइच, मोहित बंसल, संतोष अग्रवाल, सोनू, प्रवीण प्रकाश गौड़, गोपाल कृष्ण, डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, शिवप्रकाश गौड़, लव कुमार चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश, राजकिशोर उपाध्याय, ललित कुमार, डॉ. बहादुर सिंह, अर्जुन, डॉ. मनोज चतुर्वेदी, विशाल उपाध्याय, विक्रमजीत, भारती सक्सेना, व्यवसायी प्रमोद अग्रवाल, तारावती अग्रवाल व अन्य थे। शिविर में रक्त संग्रह के लिए मलखान सिंह से डॉ. नूरा, अक्षय कुमार सेंगर, शुभम, प्रीति, अरविंद, नितिन व प्रीतम शामिल रहे।

सहपऊ। गांव समदपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 बच्चों की सेहत जांची गई। बच्चों की उम्र एवं लंबाई के अनुसार वजन, आंख, नाक-कान, गला, हृदय की धड़कन एवं पल्स रेट की जांच की गई। सभी बच्चे स्वस्थ मिले। इस दौरान डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजेश, डॉ. आशा मितरा, डॉ. नीलम, रजनी, आंगनबाड़ी केंद्र से मधुर, विवेक एवं सुमन मौजूद रहीं।
चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत उत्कर्ष नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज परसौली गल्ला मंडी में योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाचार्य एचपी सिंह, सहयोगी शिवांगी और पारुल ने जीएनएम, बीएससी नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्राओं को अनुलोम-विलोम, कपालभाति, बटरफ्लाई व ताड़ासन का अभ्यास कराया तथा योग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि नियमित योग से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और तनाव कम होता है। कार्यक्रम में कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजेश त्रिवेदी, डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी, डॉ. यशस्वनी त्रिवेदी व प्राचार्य इंद्रावती चतुर्वेदी मौजूद रहीं। अतिथियों ने छात्राओं को योग को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।