मुरझाते सपनों को हवा-पानी की थोड़ी सी सही, लेकिन ठीक खुराक मिले तो वे फिर खिलने-महकने लगते हैं। इसकी बानगी 9-10 फरवरी, 2016 को देखने को मिली। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति- 2015 में सफल होकर दिल्ली आए 38 विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की खुशी के रूप में। छात्रवृत्ति के चेक पाना, केंद्रीय शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी से सम्मानित होना और देश के प्रधानमंत्री का विशेष संदेश- आर्थिक रूप से कमतर लेकिन प्रतिभा से भरपूर इन युवाओं के लिए यह सब सपने से भी पार की बात थी। छह राज्यों से आये ये 38 परिवार आते समय अलहदा परिवार थे, लौटते वक्त हरेक के पास देश के कई राज्यों में अपना एक-एक करीबी परिवार था।
गौरतलब हो कि अमर उजाला फाउंडेशन ने अगस्त, 2015 में अपने प्रसार क्षेत्र में आने वाले छह राज्यों (दिल्ली छोड़कर) के प्रादेशिक बोर्डों में पढ़ने वाले और डेढ़ लाख से कम सालाना पारिवारिक आय वाले परिवारों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए आमंत्रित किया था। सवा लाख से भी अधिक आवेदन ऑनलाइन और डाक द्वारा मिले। उनमें से पात्र पाये गये करीब 68 हजार को लिखित परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड भेजे गए। फिर 51 शहरों और अमर उजाला के 18 प्रकाशन केन्द्रों पर चली कई चरणों की चयन प्रक्रिया से 36 विद्यार्थी छात्रवृत्ति के हकदार बने। दो दृष्टिहीन विद्यार्थियों को विशिष्ट छात्रवृत्ति के लिए चुना गया।
नौंवीं-दसवीं में पढ़ने वालों को 30-30 हजार और 11-12वीं वालों को 50-50 हजार की एकमुश्त छात्रवृत्ति के रूप में चेक दिए गए। ये 38 परिवार दो दिन के लिए दिल्ली बुलाए गए- सम्मान पाने और दिल्ली घूमने के लिए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने एक-एक परिवार की सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि जानी और फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमर उजाला फाउंडेशन के इस प्रयास की सराहना करते हुए सभी सफल विद्यार्थियों को संदेश भेजा। केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने अपने कार्यालय में सबको सम्मानित किया। एक-एक विद्यार्थी से दिल को छूने वाली और हौसला बढ़ाने वाली बातें कीं। इन 38 परिवारों के लिए इन दो दिनों में उनकी जिंदगी के अविस्मरणीय पलों का विस्तार सिमटा हुआ था।
इस दौरान विद्यार्थियों के नए दोस्त तो बने ही बने, अभिभावकों को भी आपस में अपने बुझते-टूटते अरमानों के फिर से संभलने का सुख बांटने और नई जान-पहचान करने का मौका मिला। इन परिवारों में से 90 फीसदी ने पहली बार दिल्ली दर्शन किया। इस समूचे कार्यक्रम की एक और खास बात यह थी कि ये 38 परिवार ही नहीं, इस काम को अंजाम देने वाली समूची टीम, जिसमें वालंटियरों की टीम और टूरिस्ट बस के ड्राइवर भी शामिल थे, सब आपस में एक परिवार के अपनापे से बरत रहे थे। अवसर और अर्थ के अभावों को केवल प्रतिभा के बल पर मिटते देखने की खुशी की धारा एक तरफ थी और ऐसा सच्चा काम करने और ऐसी खुशी के साक्षी बनने और उसमें कुछ भूमिका अदा कर पाने की खुशी की धारा दूसरी तरफ- और इन दो धाराओं के सहज संगम का असर था यह।
मुझे तो नेता बनना है:
मेरठ से आए 12वीं के छात्र पवित से जब पूछा गया कि बड़े होकर वह क्या बनना चाहता है, तो उसने कहा, ′मुझे तो नेता बनना है। देश की राजनीति को ईमानदार युवाओं की जरूरत है और आईएएस, पीसीएस, डॉक्टर, इंजीनियर तो सभी बच्चे बनना चाहते हैं, लेकिन नेता बनकर देश और समाज सेवा के बारे में कोई नहीं सोचता।′ मैं कॉलेज में एडमिशन लेकर सबसे पहले छात्र नेता और फिर विधायक या सांसद बनना चाहता हूं। पवित ने अपने इस लक्ष्य का जिक्र जब स्मृति ईरानी से किया, तो राजनीति में पवित की दिलचस्पी देखकर वह भी बहुत खुश हुईं।
कानपुर किसी शहर से पीछे नहीं:
दिल्ली भ्रमण के दौरान कानपुर का वैभव जब अपने दोस्तों के साथ बस यात्रा कर रहा था, तो कुछ दोस्तों में चर्चा यह छिड़ गई कि हमारा शहर कितना आगे है। विश्वास जम्मू का गुणगान कर रहा था, तो हिमांशु लखनऊ का और निखिल नैनीताल का। लेकिन, इस चर्चा में बाजी मारी वैभव ने उसने अपने दोस्तों को बताया कि कानपुर किसी मामले में किसी मेट्रो शहर से पीछे नहीं है। यहां अंतराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम (ग्रीन पार्क), भारतीय रिजर्व बैंक का रिजनल ऑफिस और भारतीय जीवन बीमा निगम का जोनल ऑफिस भी है।
ईश्वर हमेशा परीक्षा लेता है
श्रुति कहती हैं कि हम कोई अच्छा काम करते हैं, तो भगवान परीक्षा लेता है। पढ़ाई में आर्थिक तंगी के चलते चुनौतियां तो हैं, तो अमर उजाला की इस छात्रवृत्ति से कुछ राह आसान होने की उम्मीद जगी। अमर उजाला के कार्यक्रम में भाग लेने के लिए दिल्ली रहे थे लेकिन बर्फबारी से रास्ते सारे बंद हो गए। इससे वाहनों की आवाजाही बंद हो गई। इसके चलते हमें ठंडी हवाओं और बर्फीले रास्तों पर छह किलोमीटर तक पैदल यात्रा करनी पड़ी। लेकिन, दिल्ली आने का उत्साह इतना था कि जरा भी थकान नहीं हुई और फिर शिमला से दिल्ली की बस में यात्रा कर आपके सामने पूरी ऊर्जा के साथ हूं।
जगजीत सिंह की गजलों से प्रेरित हूं:
गोरखपुर से आए 12वीं के छात्र दिलीप कुमार यादव इतिहास में पीएचडी करना चाहते हैं व कॉलेज में प्रोफेसर बनना चाहते हैं। नेत्रहीन दिलीप में गजब का आत्मविश्वास है। संगीत सुनने के शौकीन दिलीप जगजीत सिंह की गजलों के मुरीद हैं। दिलीप के अनुसार, जगजीत सिंह की गजलें मन में गहरे उतरती हैं और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
भावुक अभिभावक बोले, शब्द नहीं हैं हमारे पास:
′′सच बताऊं तो पहली बार दिल्ली आया हूं। कभी सोचा भी नहीं था कि हम इस तरह से दिल्ली आएंगे। हमारे जैसे छोटे जोत वाले किसानों का दिल्ली आने का क्या काम। यह बहुत यादगार यात्रा है। बेटा अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति के लिए चुना गया है, सुन कर तो यकीन नहीं हुआ। हम भले ही बहुत गरीब हैं, लेकिन बच्चों को लेकर तो हमारे भी सपने बहुत ऊंचे हैं, यह ठीक है कि गरीब के जीवन में कठिनाइयां बहुत आती हैं, लेकिन हम भी हिम्मत हारने वाले नहीं है।′′ यह कहते हुए थोड़ा भावुक हो जाते हैं टिहरीगढ़वाल के हिमांशु के पिता ओम प्रकाश। इसी तरह से देहरादून की शरवीन परवीन की मां शबाना कहती हैं, यहां आकर बहुत अच्छा लग रहा है। बेटी ने पहले भी हमें गर्व महसूस कराया है। यह छात्रवृत्ति हमारे जीवन में नया रंग भरेगी। हरियाणा के हिसार जिले के अश्वनी के पिता ने केवल इतना ही कहा, बस क्या कहूं। मेरे पास तो शब्द ही नहीं कुछ कहूं। बस हाथ जोड़ सकता हूं।
आंखों के रास्ते छलक रहा था गम:
दस फरवरी शाम करीब सात बजे। जाने के लिए सभी बसों बैठे थे। हर कोई फिर मिलने की बात कह रहा था। तभी नैनीताल के प्रत्यक्ष गौड़ के पिता वेदानंद ने कहा- सर, घर जाने का मन नहीं हो रहा है। आप जबरदस्ती भेज रहे हैं। आप ही पूछ लीजिए क्या कोई आज यहां से जाना चाहता है, बस में बैठे सभी अभिभावक एक ही स्वर में बोले-नहीं। कुछ चेहरों पर बिछुड़ने का गम तो कुछ का गम आंखों के रास्ते छलक रहा था।
बेटे से पूछता हूं, यह सपना तो नहीं...
बच्चे और अभिभावक नौ फरवरी की रात गेस्ट हाउस में भोजन कर रहे थे। सभी बार-बार खाने की और व्यवस्था की तारीफ कर रहे थे। उनमें से विदनेश तिवारी, गुलाब चंद, दिलशेर आदि अभिभावक जो किसान लग रहे थे, ने कहा-मैंने तो सपने में भी इस तरह के स्वागत की कल्पना नहीं की थी। आप लोगों के कारण ही पहली बार दिल्ली आने का मौका मिला। हम बहुत कम जोत वाले किसान हैं। इस तरह तो हम किसी होटल में भी आज से पहले कभी नहीं ठहरे। कभी सोचा नहीं था कि ऐसे कमरों में ठहरेंगे, ऐसी बसों में सफर करेंगे और कभी इंडिया गेट, लाल किला और राष्ट्रपति भवन अपनी आंखों से देख पाएंगे। अपने आप पर विश्वास नहीं हो रहा है। कई बार बेटे से पूछता हूं, यह सपना तो नहीं?
आमतौर पर 1.5 लाख से कम वार्षिक आय वाले परिवारों को कम ही मौका मिलता है कि वह भारत के अलग-अलग प्रांतों का भ्रमण करें। ऐसे में युवाओं में यह उत्सुकता स्वाभाविक है कि अलग-अलग प्रांत की सभ्यताओं में, रहन-सहन आदि में कैसे अंतर होते हैं। अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति ने छात्र-छात्राओं के लिए 9-10 फरवरी को ऐसा एक मंच दिया जहां अलग-अलग रीति-रिवाजों और प्रांतों के लोग एक जगह मिले। जम्मू से आए विश्वास और शाहजहांपुर के रचित ने तो ऐसी जोड़ी बनाई कि उनके माता-पिता भी चकित रह गए। विश्वास की मां ने बताया कि इन दो दिन में विश्वास और रचित अपने मां-बाप को भी भूल ही गए। कुछ ऐसा ही हाल मुरादाबाद की सुगरा और शिमला से आई श्रुति, जम्मू की मीनल और देहरादून की शरमीन, और कई अन्य छात्रों का भी था।
संदीप बना दिलीप और राजकुमार की दृष्टि:
गोरखपुर से नोएडा आते समय संदीप और उसके पिता का टिकट कंफर्म नहीं हो पाया। संदीप किसी भी तरह से दिल्ली पहुंचना चाहता था। उधर, दृष्टि बाधित दिलीप और राजकुमार के पास तीन सीटें थी और चार लोग बैठने वाले। दिलीप ने बेहिचक उसमें से एक सीट संदीप को दे दी। इस तरह से एक आत्मीय रिश्ते की शुरुआत हो गई। अगले दो दिन तक जहां भी छात्रों को घुमाया गया, संदीप लगातार दिलीप और राजकुमार के साथ उनकी आंखें बने रहे।
देश के हर कोने में है अब हमारा घर..
जितना उत्साह छात्रवृत्ति पाने वाले छात्रों में था, उतना ही उनके साथ आए अभिभावकों में भी था। 10 फरवरी की शाम को जब विद्यार्थियों को मानव संसाधन मंत्रालय ले जाया गया, उस वक्त सभी अभिभावकों को दिल्ली के इंद्रस्थ पार्क में ले जाया गया। उस एक घंटे में सभी अभिभावक एक परिवार की तरह समूह में बैठ गए और सभी ने दिल खोल कर एक-दूसरे से बातचीत की। सबने अपने-अपने गांव के बारे में बताया, एक दूसरे से अपने नंबर और घर के पते साझा किए और सभी को अपने-अपने घरों में आमंत्रित किया। तभी रचित के पिता जी साथ आए फाउंडेशन के साथी को धन्यवाद देते हुए कहा, ′′हमे इस बात की खुशी है कि हमारे बेटे को छात्रवृत्ति मिली। पर उससे ज़्यादा खुशी इस बात की है कि देश के कई हिस्सों में अब हमारा एक घर, एक दोस्त है।′′
कई नए रिश्ते जुड़े, कई नए अनुभव मिले..
चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत उत्कर्ष नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज परसौली गल्ला मंडी में योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाचार्य एचपी सिंह, सहयोगी शिवांगी और पारुल ने जीएनएम, बीएससी नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्राओं को अनुलोम-विलोम, कपालभाति, बटरफ्लाई व ताड़ासन का अभ्यास कराया तथा योग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि नियमित योग से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और तनाव कम होता है। कार्यक्रम में कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजेश त्रिवेदी, डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी, डॉ. यशस्वनी त्रिवेदी व प्राचार्य इंद्रावती चतुर्वेदी मौजूद रहीं। अतिथियों ने छात्राओं को योग को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।
अलीगढ़। अमर उजाला के बैनर तले मसूदाबाद चौक स्थित एसएस मेडिसेंटर में शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें 55 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। वरिष्ठ हृदय एवं डायबिटीज रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंघल के निर्देशन में आयोजित निशुल्क शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. उज्ज्वल सिंघल ने 55 मरीजों की निशुल्क बीएमडी (बोन मिनरल डेंसिटी) जांच की। मरीजों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति के हिसाब से चिकित्सकीय परामर्श भी प्रदान किया। उन्होंने कहा कि समय-समय पर जांच कराने से ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं का समय रहते पता लगाया जा सकता है और उचित उपचार संभव हो पाता है।

नई दिल्ली
विश्व रक्तदाता दिवस पर रविवार को अमर उजाला फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित रक्तदान शिविरों में हर वर्ग के लोग शामिल हुए। 40 डिग्री से ऊपर की भीषण गर्मी और उमस के बीच दूसरों की जान बचाने के लिए हजारों लोगों ने रक्तदान कर स्वस्थ भारत के निर्माण की मुहिम में अपना योगदान दिया। रक्तदान शिविरों में कई जगह लोग घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। किसी अनजान की जान बचाने का जज्बा महादानियों में देखते ही बनता था। पहली बार रक्तदान कर रहे युवाओं ने उत्साह दिखाया, वहीं 60 वर्ष से ऊपर के कई वरिष्ठ नागरिकों ने रक्तदान कर दूसरों को भी अमर उजाला फाउंडेशन की इस मुहिम में हिस्सा लेने के लिए प्रेरित किया। दिव्यांगजनों ने भी रक्तदान अभियान में हिस्सा लिया। शिविर में रक्तदान करने वाले प्रत्येक महादानी को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से प्रमाणपत्र वितरित किए गए।
अमर उजाला के प्रसार वाले सात में से चार राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, चंडीगढ़ और हरियाणा के 80 से अधिक शहरों में 5,270 महादानी रक्तदान किया। अकेले रोहतक यूनिट में 834 रक्तदानियों ने महादान किया।
अमर उजाला फाउंडेशन की इस मुहिम में विभिन्न अस्पताल और सामाजिक संगठन भी भागीदार बने। लखनऊ में 493, कानपुर में 290, प्रयागराज में 201, मेरठ में 617, गाजियाबाद में 166, अलीगढ़ में 171, झांसी में 110, मुरादाबाद में 127, आगरा में 237, गोरखपुर में 200, वाराणसी में 298 और बरेली में 137 यूनिट रक्तदान हुआ।
इसी तरह से चंडीगढ़ यूनिट में 604 यूनिट रक्तदान हुआ। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 45 और हिसार यूनिट में 191 लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदाताओं को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्र देकर सम्मानित किया गया।

80 प्रतिशत से ज्यादा ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी
यूपी के 28 विद्यार्थी चयनित, शेष हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश के हैं।
नौवीं-दसवीं के 23 विद्यार्थियों को मिलेंगे 50-50 हजार रुपये
11-12वीं के 23 विद्यार्थियों को मिलेंगे 75-75 हजार रुपये
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा संचालित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2025 के परिणामों की घोषणा हो गई है। छह राज्यों के प्रादेशिक शिक्षा बोर्डों के 46 प्रतिभाशाली, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को यह छात्रवृत्ति दी जा रही है। नौवीं-दसवीं में पढ़ने वाले 23 विद्यार्थियों को 50-50 हजार रुपये और 11-12वीं के 23 विद्यार्थियों को 75-75 हजार रुपये की एकमुश्त छात्रवृत्ति दी जाएगी। चूंकि अभी बोर्ड की परीक्षाएं चल रहीं हैं, इसलिए छात्रों को उनके एक-एक अभिभावक के साथ अप्रैल में नोएडा या किसी अन्य स्थान पर आमंत्रित करके सम्मानित किया जाएगा। छात्रवृत्ति पाने वाले विद्यार्थियों में अस्सी फीसदी से ज्यादा ग्रामीण पृष्ठभूमि के हैं।
अमर उजाला के प्रसार क्षेत्र वाले छह राज्यों के 22 प्रकाशन केंद्रों के जरिये नवंबर में हुई लिखित परीक्षा और उसके बाद हुए साक्षात्कार तथा आवेदकों द्वारा दिए गए दस्तावेजों का सत्यापन करके करीब डेढ़ लाख आवेदकों में से इन प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का चयन किया गया है। छात्रवृत्ति पाने वालों में उत्तर प्रदेश से 28, शेष हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड, पंजाब, हिमाचल प्रदेश आदि राज्यों से हैं ।
नौवीं-दसवीं वर्ग में:
विशाल (रोल नंबर 2590068, मथुरा)
चंद्रभान (रोल नंबर 2380262, अलीगढ़)
विनायक वर्मा (रोल नंबर 1210208, लखीमपुर खीरी)
प्रिया (रोल नंबर 2170001, पंचकुला)
पारस सिंह (रोल नंबर 2760024, चमोली)
सुखवीर (रोल नंबर 2630020, हमीरपुर)
आरती (रोल नंबर 2430178, बुलंदशहर)
रत्नेश (रोल नंबर 1390207, गोरखपुर)
गीता जोशी (रोल नंबर 1650003, चंपावत)
हरीश (रोल नंबर 1550202, हिसार)
नमन (रोल नंबर 2250020, जम्मू)
भानू (रोल नंबर 2500160, झांसी)
संजय कुमार (रोल नंबर 2830042, फतेहपुर)
रजत (रोल नंबर 2680015, कैथल)
अरेंद्र (रोल नंबर 2240398, लखनऊ)
इशिका रानी (रोल नंबर 1060462, बिजनौर)
स्कंद शर्मा (रोल नंबर 2700103, संभल)
आकाश यादव (रोल नंबर 2790064, गुरुग्राम)
शिवांश साहू (रोल नंबर 2100049, प्रतापगढ़)
मन्नू (रोल नंबर 2680380, जींद)
भव्य गौतम (रोल नंबर 1720001, बिलासपुर)
प्रभात यादव (रोल नंबर 1280288, आजमगढ़)
इसी तरह 11-12वीं के वर्ग में :
अवतार (रोल नंबर 4470292, मथुरा)
उत्कर्ष (रोल नंबर 3380422, अलीगढ़)
दीपक (रोल नंबर 3190485, बरेली)
दीपक कुमार गुप्ता (रोल नंबर 4170081, चंडीगढ़)
अजय बहुगुणा (रोल नंबर 3340315, उत्तरकाशी)
दीपशिखा (रोल नंबर 4540001, मंडी)
शोभित राघव (रोल नंबर 3420652, हापुड़)
हिमांशु वर्मा (रोल नंबर 4800004, महराजगंज)
गौरव (रोल नंबर 3460073, हल्द्वानी)
तनुज (रोल नंबर 4550104, हिसार)
गरिमा (रोल नंबर 4250037, जम्मू)
सुयश (रोल नंबर 3500673, झांसी)
अर्पित (रोल नंबर 4530137, हरदोई)
मयंक (रोल नंबर 4130136, करनाल)
आशु (रोल नंबर 4230349, अयोध्या)
अवनी (रोल नंबर 4840322, बागपत)
मनीष कुमार (रोल नंबर 3330209, अमरोहा)
विशाल (रोल नंबर 3730196, गौतम बुद्ध नगर)
शिवांशु प्रजापति (रोल नंबर 3100212, प्रतापगढ़)
मधु (रोल नंबर 4680401, रोहतक)
विनायक भारद्वाज (रोल नंबर 4150034, शिमला)
अश्वनी यादव (रोल नंबर 3271009, मिर्जापुर)
दो दृष्टिहीनों को विशेष छात्रवृत्ति
अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दो दृष्टिहीनों को विशेष छात्रवृत्ति के लिए चयनित किया गया है। इसमें सुंदरी (रोल नंबर 5390001) को संतकबीरनगर और गणेश चौरसिया (रोल नंबर 5390028) को गोरखपुर से चुना गया है।
तो निरस्त हो जाएगी छात्रवृत्ति
परीक्षा परिणाम बनाते समय बहुत सावधानी बरती गई है। सत्यापन के कई दौर के बाद भी अंतिम समय तक कुछ विद्यार्थियों द्वारा दी गई जानकारी गलत निकलती रही। जिन 46 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए चयनित किया गया है, अगर उनकी ओर से दी गई जानकारी भविष्य में सत्यापन के दौरान गलत पाई जाती है, तो छात्रवृत्ति निरस्त कर दी जाएगी।