कितने ही बीज इस दुनिया में अंकुरित होकर सहयोग और मार्गदर्शन के बिना फल-फूल नहीं पाते। सही मायनों में जरूरतमंद और मेधावी बच्चों को ये मौका दिया है अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति सम्मान ने। लोकसभा परिसर के भीतर सम्मान लेने आए गलियारे को निहारते यह अल्फाज एक अभिभावक के थे। वहीं बच्चों और उनके अभिभावकों से सहज भाव से मिलने वाली लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि स्वर्गीय अतुल माहेश्वरी के सपनों को आगे बढ़ाता अमर उजाला फाउंडेशन शानदार मिसाल पेश कर रहा है। यह छात्रवृत्ति सम्मान छात्र-छात्राओं के लिए आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है।
मंगलवार, 13 जून, 2017 को लोकसभा परिसर में अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2016 के तहत छह राज्यों के डेढ़ लाख बच्चों के बीच से चुने गए कुल 38 मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित करते हुए लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन बच्चों से उन्हीं के अंदाज में बालमन होकर मिलीं। इस मौके पर 9 और दसवीं के बच्चों को लोकसभा की ओर से वैज्ञानिक के जीवन पर आधारित पुस्तक एक था कार्वर और 11 व 12वीं के बच्चों को भारत की एकता के सूत्रधार सौंपी गई। वहीं इस मौके पर दो दृष्टिहीन मेधावी छात्रों को भी सम्मानित किया गया। इस मौके पर लोकसभा के महासचिव अनूप मिश्र और लोकसभा की संयुक्त सचिव कल्पना शर्मा और अमर उजाला फाउंडेशन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
हास्य व्यंग्य से तोड़ा बच्चों का संकोच
ग्रामीण व शहरी कस्बों से आए दूर-दराज के बच्चों के मन का संकोच तोड़ते हुए उन्होंने कहा कि आप आज हिंदुस्तान की सबसे बड़ी पंचायत में मौजूद हैं। आप लोगों के कुछ सवाल हों तो मुझसे पूछिए। संकोच की शांति तोड़ सुमित्रा महाजन ने खुद ही लोकसभा दीर्घा के बारे में बच्चों से सवाल पूछ लिया। बच्चों की ओर से जवाब मिला कि यहां कानून बनते हैं, बिल पास होते हैं। इतने में सुमित्रा महाजन ने यह कहकर बच्चों के लिए जटिल माहौल को सरल कर दिया कि मुझे लगा था कि आप जवाब देंगे कि यहां झगड़ा होता है। बच्चों की हंसी फूट पड़ी और माहौल सरल हो गया।
भविष्य में कुछ भी बनना लेकिन मन में सही भाव रखकर
इसी सरलता के साथ सुमित्रा महाजन ने बच्चों से उनकी रुचियां भी जानीं। किसी ने खेल में राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचकर सफल न होने का मलाल बताया तो किसी ने राज्य स्तरीय खिलाड़ी होने का गौरव पेश किया। वहीं भविष्य में कुछ बनने के सवाल पर भी बच्चों की ओर से जवाब आईएएस, आईपीएस, डॉक्टर और सबसे ज्यादा इंजीनियर बनने को लेकर आए। इस पर बच्चों को नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ पढना ही नहीं बल्कि खेलना भी जरूर है।
खासतौर से लड़कियों को जरूर खेलना चाहिए। आबादी के दबाव में खेल के मौदान गुम होते जा रहे हैं जब आप घरों से बाहर निकलेंगे तो शायद ही खेल के मैदान दिखाई दें। खेल से सामूहिक भाव पैदा होता है जो कि बेहद जरूरी है। जिंदगी में आप कुछ भी बनिए सबसे बड़ी जरूरत अच्छा इंसान बनने की है। मन में भाव रखकर काम करिए। व्यापारी भी बनिए तो बेहतर और अच्छे इंसान बनकर। यह छात्रवृत्ति आपकी बुद्धि से कमाई गई पहली तनख्वाह है। यह अंत नहीं बल् कि यहां से ही सपनों की उड़ान है। अमर उजाला के चुने होनहार सुमित्रा महाजन से कब घुल-मिल गए पता ही नहीं चला। सवाल-जवाब का सिलसिला चलता रहा।
बच्चों की राय-प्रतिक्रिया
विश्वास नहीं हो रहा कि इतनी जल्दी लोकसभा घूमकर आऊंगा। घर-परिवार और गांव में अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति सम्मान के कारण मुझमें आत्मविश्वास जागा है। इतनी बड़ी परीक्षा थी मैंने इसे सफल कर लिया यह सपने जैसा है। मैं बड़ा होकर पीसीएस अधिकारी बनना चाहता हूं।-आशीष कुमार मौर्य, कुंडा,प्रतापगढ़, यूपी
मुझे बेहद खुशी है कि मैं अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा-2016 का न सिर्फ हिस्सा बना बल्कि इसमें सफल भी हुआ। इस सम्मान ने मेरे हौसले को चार गुणा बढ़ा दिया है। मैं बड़ा होकर एक प्रशासनिक अधिकारी बनना चाहता हूं।-प्रखर दीक्षित, लखीमपुर, यूपी
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति परीक्षा मेरे जीवन का पहली प्रतियोगिता थी। इसको पार करने के बाद अब लगता है कि सभी प्रतियोगिताएं आसानी से पार हो जाएंगी। मैं दृष्टिहीन जरूर हूं लेकिन पढ़ाई के बाद यह भाव कम होता गया और मैं एक मजबूत व्यक्ति बनने की कोशिश कर रहा हूं। सभी का भरपूर सहयोग मिल रहा है। बड़ा होकर शिक्षक बनना चाहता हूं।-सुनील कुमार गुप्ता, कुशीनगर, यूपी
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति सम्मान एक पंख की तरह है। अब मैं हर किसी में भारतीय भावना को जागृत करना चाहता हूं। हमारी संस्कृति के बारे में ज्यादा प्रचार-प्रसार करना मेरा लक्ष्य है। भाषाओं में दिलचस्पी है।-अमित कुमार त्रिपाठी, महाराजगंज, यूपी
अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति सम्मान मिलने से मुझे और मेरे मां-पिता को बेहद खुशी है। मैं कृषि और बागबानी के क्षेत्र में बेहतर भविष्य चाहती हूं। इसलिए आगे मैं इसी ओर अपना कदम बढाऊंगीं।-ज्योति रावत, चंबा, हिमाचल प्रदेश
पहली बार पंजाब से दिल्ली आयी हूं और सोचा भी नहीं था कि लोकसभा जाने का मौका मिलेगा। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दिया गया यह छात्रवृत्ति सम्मान मेरे लिए बेहद मायने रखता है। मैं भविष्य में एक शिक्षक बनना चाहती हूं। मेरा पसंदीदा विषय भौतिकी विज्ञान है।-मुश्कान चुघ, श्री मुक्तसर साहिब, पंजाब

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन और श्री बाबा लालजी सेवा ट्रस्ट व पीसीएसएस की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। 53 लोगों ने अपनी सेहत की जांच कराई। यहां बीपी, शुगर, एसपीओटू, वजन और आंखों की जांचें की गईं। अधिकतर रोगी जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर आए। शिविर में रामा हॉस्पिटल के अलावा अशोक कपूर, राजेश सच्चर, राजू वालिया, पवन त्रिवेदी, रमेश मिश्रा, पंकज निषाद, इंद्रपाल सिंह सिमर, अखिल, रिजवान, डॉ. कविता आदि मौजूद रहे।

हाथरस। मेंडू रोड स्थित माया इंस्टीट्यूट में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत एक दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य प्रशिक्षक सिहान एमएस समुराई ने छात्राओं से कहा कि जब कोई सड़क पर परेशान करे तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे मुंह तोड़ जवाब दें। इसके लिए खुद की रक्षा करना सीखें।
उन्होंने कहा कि छेड़खानी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अपराधी अक्सर लड़कियों को सॉफ्ट टारगेट (कमजोर) मानकर निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मार्शल आर्ट एक शानदार और बेहद असरदार कला है। इसे सीखकर महिलाएं न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि अपनी रक्षा भी खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को पंच, किक और ब्लॉकिंग के व्यावहारिक दांव-पेच सिखाए। बताया कि अगर कोई अचानक हमला कर दे, तो बैग में मौजूद पेन या पिन भी एक हथियार बन सकता है। इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने की अपील की। वुमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्प डेस्क 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डायल 112 के प्रयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला, श्वेता सेंगर, निर्मल, चेष्ठा दीक्षित, नेहा सिंह, कल्पना निगम, साक्षी दीक्षित, खुशी सिंह, संघमित्रा, बीनेश, अजय वीर सिंह और भरत कुमार मौजूद रहे।

इगलास। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले इगलास सीएचसी में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में 28 लोगों ने रक्तदान कर लोगों को जागरूक किया। शिविर का शुभारंभ अधीक्षक डॉ. ज्योति शर्मा व सीएचसी बेसवां के अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। कस्बे के डॉक्टर, पुलिस कर्मियों के साथ अन्य लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले गौरव शर्मा, देवराज, अभिषेक, योगेंद्र नगाइच, मोहित बंसल, संतोष अग्रवाल, सोनू, प्रवीण प्रकाश गौड़, गोपाल कृष्ण, डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, शिवप्रकाश गौड़, लव कुमार चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश, राजकिशोर उपाध्याय, ललित कुमार, डॉ. बहादुर सिंह, अर्जुन, डॉ. मनोज चतुर्वेदी, विशाल उपाध्याय, विक्रमजीत, भारती सक्सेना, व्यवसायी प्रमोद अग्रवाल, तारावती अग्रवाल व अन्य थे। शिविर में रक्त संग्रह के लिए मलखान सिंह से डॉ. नूरा, अक्षय कुमार सेंगर, शुभम, प्रीति, अरविंद, नितिन व प्रीतम शामिल रहे।

सहपऊ। गांव समदपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 बच्चों की सेहत जांची गई। बच्चों की उम्र एवं लंबाई के अनुसार वजन, आंख, नाक-कान, गला, हृदय की धड़कन एवं पल्स रेट की जांच की गई। सभी बच्चे स्वस्थ मिले। इस दौरान डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजेश, डॉ. आशा मितरा, डॉ. नीलम, रजनी, आंगनबाड़ी केंद्र से मधुर, विवेक एवं सुमन मौजूद रहीं।

चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।