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डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, हिसार के बच्चों ने सराहा पुलिस की पाठशाला को

  • calendar_month 30,NOV 2015
डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, हिसार के बच्चों ने सराहा पुलिस की पाठशाला को

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हिसार के कैमरी रोड स्थित के.एल. आर्य डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गयाl पाठशाला में मौजूद पांच सौ से अधिक छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए एएसआई सज्जन कुमार ने विद्यार्थियों को कानून की जानकारी दी वहीं गलतियों से सीख लेने की अपील की। इस मौके पर बच्चों ने कई सवाल पूछकर अपनी जिज्ञासा को शांत किया और नशा जैसी बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लिया।
 
एएसआई सज्जन कुमार ने बच्चों को बताया कि हम सभी को सम्मान और अधिकारपूर्वक जीने का अधिकार है। हर कोई मान-सम्मान से जीना चाहता है। इसलिए सभी का सम्मान करें। नारी जाति का विशेष सम्मान करें तभी हमारा समाज मजबूत होगा और विकास की ओर अग्रसर होगा। छोटी उम्र में गलत आदत शुरू होती हैं जो जिंदगी भर साथ रहती हैं। इसलिए इस उम्र में बच्चों को शिक्षा के साथ संस्कार दिए जाएं तो वे बुराइयों से बचे रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों से बच्चों को कानून की जानकारी मिलती है। कानून के प्रति जागरूक होते हैं और समाज में सजगता आती है।
 
मानवाधिकार आयोग से पुरस्कृत एएसआई सज्जन कुमार से रु-ब-रु होने के बाद बच्चों ने अमर उजाला फाउंडेशन की पहल पुलिस की पाठशाला की सराहना की और कहा कि पाठशाला में एक ओर जहां कानून की जानकारी और कानूनन अधिकारों का पता चला। वहीं पुलिस के प्रति उनकी सोच भी बदली। और बताया कि इस तरह पहली बार किसी पुलिस अधिकारी से सीधा बातचीत करने का
मौका मिला है। छात्रों ने पुलिस के हाथ मजबूत करने और बुराइयों से बचने का संकल्प भी जताया। बच्चों को समझाया गया कि हेलमेट को भार नहीं समझें। अमूमन चालान से बचने के लिए हेलमेट पहनते हैं, यह मानसिकता ठीक नहीं। यदि वाहन चालक हेलमेट पहने तो सड़क हादसे में सिर की चोट के कारण होने वाली 80 फीसदी मौतें रोकी जा सकती हैं।
 
आज बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती ये ही है कि किस तरह से अपनी बुद्धि और विचारों को शुद्ध रख सकेंगे। सूचना तकनीक के इस युग में सभी जानकारी एक पल में मिल जाती हैं। इनमें से अधिकांश जानकारी और चित्र मन में विकार पैदा करते हैं। नेट और मोबाइल के जरिये मिलने वाली अधिकांश जानकारियों में नैतिकता का कोई स्तर नहीं होता है। ऐसे में बच्चों के कोमल मन को इनसे बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। इस कारण समाज में छोटी उम्र में अपराध बढ़ने लगे हैं।
 
विद्यार्थी यह करें:
•ज्ञानवर्द्धक पुस्तकों को अध्ययन करें
•ध्यान और योग निरंतर करें
•संध्या के समय बुरी और अच्छी आदतों पर विचार करें और बुरी आदतों को त्यागनेे का संकल्प लें
•नारी जाति का सम्मान करना सीखें
•अपराध का विरोध करें, पुलिस को सूचना दें
•हर परिस्थिति से सीखने का प्रयास करें
 
विद्यार्थी ये ना करें: 
•एक दूसरे का अपमान नहीं करें, खासतौर पर धर्म और जाति को लेकर कतई नहीं
•मोबाइल फोन और नेट का गलत उपयोग नहीं
•मानसिकता विकृत करने वाले कार्यक्रम न देखें
•नशे से दूर रहें और इस पर चिंतन करें
•तेज गति में बाइक नहीं चलाएं
•अपनी व दूसरों की गलती पर कभी हंसे नहीं

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