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आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी

  • calendar_month 09,AUG 2019
आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी

अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चलचित्र समिति की ओर से शुक्रवार, 9 अगस्त, 2019 को गाजियाबाद के औद्योगिक क्षेत्र स्थित संस्कार को-एजुकेशनल स्कूल में बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान कक्षा छह से 11वीं तक की कक्षा के लगभग 450 छात्र-छात्राओं को ‘एक अजूबा’ नामक बाल फिल्म दिखाई गई।

फिल्म के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जागरूक किया गया कि आत्म विश्वास ही सफलता की असली कुंजी है। फिल्म में दिखाया गया कि एक बहन-भाई होते हैं। बहन काफी मेहनत से पढ़ाई करती है, लेकिन वह कक्षा में हमेशा दूसरे नंबर पर आती है। जबकि उसका भाई कम पढ़ाई करता है और वह गलत दोस्तों के चक्कर में पड़ जाता है। चोरी से लेकर अन्य काम करने की कोशिश करता है। पढ़ाई से वह पूरी तरह भटक जाता है।

वहीं कक्षा में द्वितीय स्थान पर रहने से बहुत दुखी होती है। वह एक दिन रो रही होती है और अपनी मां को बोलती है कि मैं हमेशा दूसरे स्थान पर ही क्यों आती हूं? फिल्म में आगे दिखाया कि इसी दौरान एक बाबा आते हैं और भभूति देते हैं, साथ ही उसे मन लगाकर पढ़ने को बोलते हैं। बच्ची उस भभूति को साथ रखती है और अच्छे से पढ़ाई करती है।

कक्षा में प्रथम स्थान आने पर वह बहुत खुश होती है और मां को बताती है कि आज वह प्रथम आई है। उसके शिक्षक भी काफी खुश हैं। यह सब बाबा शंकर की भभूति का कमाल है। उसका भाई उसकी भूभूति को चुरा लेता है। इस चक्कर में उसका एक्सिडेंट हो जाता है। उसकी बहन भभूति को फेंक देती है। उसके बाद भी वह मन लगाकर पढ़ती है।

वह फिर से कक्षा में प्रथम आती है। वह बाबा के द्वारा खोले गए विद्यालय में पहुंचती है। वहां बाबा ने बताया कि भभूति ने कुछ नहीं किया। वह केवल आपके अंदर आत्मविश्वास जगाने के लिए थी। फिल्म के माध्यम से बच्चों को संदेश दिया गया कि आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी मेहनत पर भरोसा करना चाहिए।

हम बिना सोचे समझे कुछ गलत दोस्तों की संगत में पढ़ने लगते हैं। यह गलत है। जब हम किसी को दोस्त बनाते हैं तो उसके बारे में सोचना समझना जरूरी है कि वह किस प्रवृति का व्यक्ति है।- शशांक, छात्र

कभी भी दोस्तों पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। भभूति या अन्य चीजों पर विश्वास करने की आवश्यकता नहीं है। आगे बढ़ने के लिए कर्म और मेहनत पर भरोसा होना चाहिए। सब अच्छा होगा।- बुशरा, छात्रा

हमें अंधविश्वास पर यकीन नहीं करना चाहिए। अपने अंदर की क्षमता को पहचानना चाहिए। जब तक हम अपने को नहीं पहचानेंगे, तब तक कोई हमें नहीं पहचान पाएगा।- हर्षित चौधरी, छात्र

हमें दूसरों की बातों पर विश्वास न करके अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। इससे हम अपने लक्ष्य को आसानी से प्राप्त कर सकते हैं। ऐसे लोगों से दूरी बना लें, जो हमें लक्ष्य से भटका रहे हैं।- स्वेताक्षी, छात्रा

अमर उजाला का सराहनीय कदम है। ऐसी फिल्में देखने के बाद छात्र-छात्राओं को अच्छे और बुरे की परख होती है। बच्चे छोटे होने के कारण चीजों को अच्छे से समझ नहीं पाते हैं। बच्चों को इस तरह से समझाने के लिए अमर उजाला का आभार और धन्यवाद।- इंदिरा जिंदल, शिक्षिका

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