अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से मंगलवार, 30 अगस्त, 2016 को हल्द्वानी के रामपुर रोड स्थित एसकेएम सीनियर सेकेंडरी स्कूल में पुलिस की पाठशाला का आयोजन किया गयाl पाठशाला में एसएसपी स्वीटी अग्रवाल ने छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए बताया कि सोशल साइट की खूबियों को जीवन में उतारते हुए बेहतर कॅरियर बनाने की सलाह दी। छात्र-छात्राओं को आगाह भी किया कि सोशल साइट की खामियों से सतर्क रहें। थोड़ी असावधानी जीवन में कई परेशानियां पैदा कर सकती है।
विद्यार्थियों को यातायात नियमों की जानकारी देते हुए एसएसपी ने कहा कि दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें। बताया कि देश में रोड एक्सीडेंट में मारे जाने वालों में 80 फीसदी लोग बगैर हेलमेट वाहन चलाने वाले होते हैं। रोड एक्सीडेंट में सबसे ज्यादा मौतें हेड इंजरी के कारण होती हैं। हेलमेट अनिवार्यता अभियान पुलिस लोगों की जान बचाने के लिए चलाती है।
उन्होंने बच्चों को बताया कि सोशल मीडिया पर अनजान व्यक्ति से फ्रेंडशिप न करें ताकि साइबर अपराधियों से बच सकें। फेसबुक पर अनजान व्यक्ति को एड करने से साइबर अपराधी उनकी प्रोफाइल के गलत इस्तेमाल से आपको बड़ी परेशानी में डाल सकता है। मोबाइल पर लाटरी लगने, इनाम जीतने जैसे कॉल से लालच में आने के बजाए सतर्क रहें। ऐसे कॉल से लोग ठगी का शिकार होते हैं। अपना एटीएम, बैंक एकाउंट नंबर किसी को न बताएं। उन्होंने छात्राओं को यू- ट्यूब पर वीडियो एवं फोटाग्राफ अपलोड न करें। अपराधी इनका गलत इस्तेमाल कर मुश्किलें बढ़ा सकते हैं।
एसएसपी ने कहा कि सुरक्षा को लेकर किसी तरह की शिकायत हो तो सिटी कंट्रोल के डायल-100 या वूमेन पॉवर लाइन- 1090 नंबर पर कॉल करें। यदि पुलिस सुनवाई न करे, कार्रवाई नहीं करती तो अन्य अफसरों से शिकायत करें। आपराधिक आंकड़ों का जिक्र करते हुए बताया कि देश में 80 फीसदी बलात्कार के मामलों में परिवार के परिचित लिप्त पाए गए हैं, इसलिए सावधानी जरूरी है। इससे पूर्व पाठशाला का शुभारंभ एसएसपी के साथ विद्यालय प्रबंधक यूसी जोशी एवं प्रधानाचार्य प्रवीण पंत ने मां सरस्वती की मूर्ति के समक्ष दीप जलाकर किया। इस मौके पर बच्चों ने एसएसपी से सीधा संवाद किया और कई सवाल भी पूछेl
सवाल : स्कूटी चलाने के लिए 18 साल से पहले क्या करना चाहिए? (प्रियंका, कक्षा 12)
जवाब : नियमत: 18 वर्ष की आयु पूरी होने से पहले दो पहिया नहीं चला सकते। हां 17 साल की उम्र में कम हार्स पावर का गियरलेस वाहन चला सकते हैं।
सवाल : अपना फेसबुक एकाउंट डिएक्टिव करें तो क्या सारे पोस्ट मिट जाएंगे, प्राइवेसी का क्या होगा? (सोनिया सिंह, कक्षा 12)
जवाब : फेसबुक एकाउंट डिएक्टिव कर सकते हैं।
सवाल : सरकार व्हाट्सएप और अन्य एप्स को प्रतिबंधित क्यों नहीं करती? (शुभम, कक्षा 11)
जवाब : इंटरनेट के दौर में इन पर प्रतिबंध नहीं लग सकता, सावधानी ही किसी मुसीबत से बचा सकती है।
सवाल : पुलिस क्राइम होने के बाद क्यों पहुंचती है? (चांदनी, कक्षा 10)
जवाब : घटना की सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंचती है। दे से पहुंचने की बातें फिल्मों में ही होती हैं। पुलिस क्राइम को रोकने के लिए सजग रहती है।
सवाल : पुलिस निर्दोष को परेशान करती है, यह गलत है या सही? (कमलेश मंडल, कक्षा 12)
जवाब : पुलिस परेशान करने के लिए नहीं है। कोई पुलिस कर्मी ऐसा मिले तो सीओ या दूसरे अफसर से शिकायत कर सकते हैं।
सवाल : कोई हमारा फेसबुक एकाउंट कैसे प्राप्त कर सकता है? (हिमानी, कक्षा 10)
जवाब : फेसबुक एकाउंट या कोई भी जानकारी लेना मुश्किल नहीं है। फेसबुक चलाने वाले को सतर्क रहना चाहिए।
सवाल : पुलिस जान-पहचान वाले को क्यों छोड़ देती है? (नमन, कक्षा 10)
जवाब : ऐसा नहीं है। कभी पुलिस वाले से प्यार से बोलकर देखो आपको भी छोड़ देगा।
सवाल : पुलिस किसी अपराध का खुलासा करने में महीनों क्यों लगाती है, जैसे कशिश कांड (प्रेम कुमार कक्षा 12)
जवाब : कशिश कांड में कई अहम बिंदु होने से खुलासे में थोड़ा वक्त लगा। अब मामला कोर्ट में ट्रायल में चल रहा है।
सवाल : ऐसी फिल्मों को प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जाता, जिसमें पुलिस को गलत दिखाया जाता है? (प्रियंका, कक्षा 12)
जवाब : ब्रिटिश काल में पुलिस का इस्तेमाल जनता के उत्पीड़न के लिए किया जाता था। तभी से पुलिस की छवि ऐसी बनी है।

हाथरस। मेंडू रोड स्थित माया इंस्टीट्यूट में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत एक दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य प्रशिक्षक सिहान एमएस समुराई ने छात्राओं से कहा कि जब कोई सड़क पर परेशान करे तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे मुंह तोड़ जवाब दें। इसके लिए खुद की रक्षा करना सीखें।
उन्होंने कहा कि छेड़खानी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अपराधी अक्सर लड़कियों को सॉफ्ट टारगेट (कमजोर) मानकर निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मार्शल आर्ट एक शानदार और बेहद असरदार कला है। इसे सीखकर महिलाएं न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि अपनी रक्षा भी खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को पंच, किक और ब्लॉकिंग के व्यावहारिक दांव-पेच सिखाए। बताया कि अगर कोई अचानक हमला कर दे, तो बैग में मौजूद पेन या पिन भी एक हथियार बन सकता है। इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने की अपील की। वुमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्प डेस्क 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डायल 112 के प्रयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला, श्वेता सेंगर, निर्मल, चेष्ठा दीक्षित, नेहा सिंह, कल्पना निगम, साक्षी दीक्षित, खुशी सिंह, संघमित्रा, बीनेश, अजय वीर सिंह और भरत कुमार मौजूद रहे।

इगलास। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले इगलास सीएचसी में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में 28 लोगों ने रक्तदान कर लोगों को जागरूक किया। शिविर का शुभारंभ अधीक्षक डॉ. ज्योति शर्मा व सीएचसी बेसवां के अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। कस्बे के डॉक्टर, पुलिस कर्मियों के साथ अन्य लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले गौरव शर्मा, देवराज, अभिषेक, योगेंद्र नगाइच, मोहित बंसल, संतोष अग्रवाल, सोनू, प्रवीण प्रकाश गौड़, गोपाल कृष्ण, डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, शिवप्रकाश गौड़, लव कुमार चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश, राजकिशोर उपाध्याय, ललित कुमार, डॉ. बहादुर सिंह, अर्जुन, डॉ. मनोज चतुर्वेदी, विशाल उपाध्याय, विक्रमजीत, भारती सक्सेना, व्यवसायी प्रमोद अग्रवाल, तारावती अग्रवाल व अन्य थे। शिविर में रक्त संग्रह के लिए मलखान सिंह से डॉ. नूरा, अक्षय कुमार सेंगर, शुभम, प्रीति, अरविंद, नितिन व प्रीतम शामिल रहे।

सहपऊ। गांव समदपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 बच्चों की सेहत जांची गई। बच्चों की उम्र एवं लंबाई के अनुसार वजन, आंख, नाक-कान, गला, हृदय की धड़कन एवं पल्स रेट की जांच की गई। सभी बच्चे स्वस्थ मिले। इस दौरान डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजेश, डॉ. आशा मितरा, डॉ. नीलम, रजनी, आंगनबाड़ी केंद्र से मधुर, विवेक एवं सुमन मौजूद रहीं।
चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता अभियान के तहत उत्कर्ष नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज परसौली गल्ला मंडी में योग कार्यक्रम आयोजित किया गया। योगाचार्य एचपी सिंह, सहयोगी शिवांगी और पारुल ने जीएनएम, बीएससी नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्राओं को अनुलोम-विलोम, कपालभाति, बटरफ्लाई व ताड़ासन का अभ्यास कराया तथा योग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि नियमित योग से शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य बेहतर रहता है और तनाव कम होता है। कार्यक्रम में कॉलेज के चेयरमैन डॉ. राजेश त्रिवेदी, डायरेक्टर डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी, डॉ. यशस्वनी त्रिवेदी व प्राचार्य इंद्रावती चतुर्वेदी मौजूद रहीं। अतिथियों ने छात्राओं को योग को जीवन का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया।