भिवानी। स्वस्थ और सुरक्षित जीवन के लिए बुधवार को खरक गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। विशेषज्ञ चिकित्सों से हर कोई सलाह और उपचार के लिए बेताब नजर आया। चार घंटे के शिविर में साढ़े चार सौ अधिक लोगों ने पंजीकरण कराकर स्वास्थ्य की जांच कराई। मरीजों को निशुल्क दवाएं भी दी गईं। ‘स्वस्थ शरीर-सुरक्षित जीवन' मुहिम के तहत अमर उजाला फाउंडेशन ने बुधवार को खरक गांव में अपना दूसरा स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया।
प्रातः 10 बजे से शुरू होने वाले शिविर में जांच कराने के लिए घंटों पहले से ही ग्रामीण जुटने लगे थे। शिविर में सबसे अधिक संख्या महिलाओं और युवाओं की रही। स्त्री रोग विशेषज्ञ डा.सुधा गर्ग ने महिला मरीजों की जांच कर परामर्श व दवाएं दी तो बाल रोग विशेषज्ञ के रूप में डा.एनके गर्ग ने चेकअप किया। मेडिकल ऑफिसर डा.टीकाराम ने सर्दी, खांसी, बुखार जैसी मौसमी व अन्य बीमारियों से पीड़ित मरीजों को उपचार दिया तो डेंटल सर्जन डा.राजेश ने दांतों से सम्बन्धित शिकायतें दूर की। शिविर में सबसे ज्यादा भीड़ नेत्र रोगियों की रही। जालान अस्पताल के चिकित्सक डा.सतीश ने इत्मीनान से मरीजों के आंखों की जांच कर दवाएं दी। उन्होंने आंखों की सही देखभाल के लिए परामर्श भी दिए। इससे पहले शिविर का शुभारंभ सिविल सर्जन डा.रमेश धनखड़ ने किया। उन्होंने समाचार पत्र की ओर से जन सेवा के लिए सराहना की। कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन का प्रयास सराहनीय है।
शिविर के आयोजन में खरक पीचसी के हेल्थ इंस्पेक्टर पवन, राजवीर, एलएचवी अनीता, एलटी शीलवंती, श्रीनिवास, मनोज, एएनएम विमला, राजेश, उर्मिल, कृष्ण सहित बिट्टू शर्मा, अमित ग्रेवाल, वीरेन्द्र खरक, राजू, जयराम ने सक्रिय भागीदारी निभाई। शिविर में जांच के दौरान 25 मरीजों को ऑपरेशन के लिए चिह्नित किया गया। सभी मरीज आंखों की बीमारी से सम्बन्धित हैं। इनमें से ज्यादातर मरीजों में सफेद मोतिया की शिकायत पाई गई। चिकित्सक ने उनका पंजीयन कर निशुल्क ऑपरेशन के लिए जालान अस्पताल आने की सलाह दी।
क्या कहते हैं लोग
दवा-उपचार के लिए इस उम्र में दूसरे अस्पतालों तक जाना नहीं हो पाता। अखबार ने गांव में कैंप लगाकर हम जैसे मरीजों के लिए बड़ी सहूलियत दी है। यहां एक साथ डॉक्टर और दवा दोनों मिल गए। -नानबाई।
कई दिनों से खांसी, जुकाम से पीड़ित थे। साथ न मिलने से बड़े अस्पताल तक नहीं जा पा रहे थे। गांव में ही कैंप लगने से खुद आकर चेकअप करा लिया। खास तौर से महिलाओं के लिए ऐसे कैंप काफी उपयोगी हैं। -संतोष देवी।
आंखों की समस्या से परेशान हैं। काफी दिनों से शहर जाने की सोच रहे हैं, मगर जा नहीं पा रहे। वहीं के डॉक्टर खुद गांव आए हैं तो लाभ लेने में क्या हर्ज है। ऐसे कार्यक्रम आगे भी होने चाहिए। -राजेन्द्र, खरक कलां।
शिविर की सबसे खास बात यह रही कि स्कूली बच्चों में अपने स्वास्थ्य के प्रति सजगता दिखी। गांव के राजकीय व.मा.विद्यालय व राजकीय कन्या व.मा.विद्यालय से छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर शिविर में हिस्सा लिया और स्वास्थ्य की जांच कराई। राजकीय कन्या विद्यालय के 9वीं कक्षा की छात्राओं को शिक्षिका ललिता और मीनाक्षी खुद लेकर कैंप तक पहुंचीं। प्रधानाचार्य नरेन्द्र परमार व राजकीय व.मा.विद्यालय के प्राचार्य ज्ञानेन्द्र ने भी बच्चों को जागरूक शिविर में पहुंचने के लिए प्रोत्साहित किया।
बदलती दिनचर्या और खान-पान में लापरवाही से बच्चों में आंखों की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। बुधवार को स्वास्थ्य शिविर में नौंवीं कक्षा की 65 छात्राएं आंखों की समस्या से ग्रस्त मिलीं। नेत्र रोग विशेषज्ञ सतीश ने जांच के बाद उन्हें दवाएं दी और सही देखभाल के लिए परामर्श भी दिया। उन्होंने विद्यालय के शिक्षकों से वार्ता कर सभी छात्राओं की आंखों की जांच के लिए जल्द ही विद्यालय में विशेष कैंप लगाने और प्रभावित छात्राओं को निशुल्क चश्मा वितरित करने को कहा।

कानपुर। अमर उजाला फाउंडेशन और श्री बाबा लालजी सेवा ट्रस्ट व पीसीएसएस की ओर से निशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। 53 लोगों ने अपनी सेहत की जांच कराई। यहां बीपी, शुगर, एसपीओटू, वजन और आंखों की जांचें की गईं। अधिकतर रोगी जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर आए। शिविर में रामा हॉस्पिटल के अलावा अशोक कपूर, राजेश सच्चर, राजू वालिया, पवन त्रिवेदी, रमेश मिश्रा, पंकज निषाद, इंद्रपाल सिंह सिमर, अखिल, रिजवान, डॉ. कविता आदि मौजूद रहे।

हाथरस। मेंडू रोड स्थित माया इंस्टीट्यूट में अमर उजाला फाउंडेशन के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत एक दिवसीय आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। मुख्य प्रशिक्षक सिहान एमएस समुराई ने छात्राओं से कहा कि जब कोई सड़क पर परेशान करे तो घबराएं नहीं, बल्कि उसे मुंह तोड़ जवाब दें। इसके लिए खुद की रक्षा करना सीखें।
उन्होंने कहा कि छेड़खानी और घरेलू हिंसा जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अपराधी अक्सर लड़कियों को सॉफ्ट टारगेट (कमजोर) मानकर निशाना बनाते हैं। ऐसे अपराधियों को मुंह तोड़ जवाब देने के लिए मार्शल आर्ट एक शानदार और बेहद असरदार कला है। इसे सीखकर महिलाएं न सिर्फ शारीरिक रूप से स्वस्थ रह सकती हैं, बल्कि अपनी रक्षा भी खुद कर सकती हैं। उन्होंने छात्राओं को पंच, किक और ब्लॉकिंग के व्यावहारिक दांव-पेच सिखाए। बताया कि अगर कोई अचानक हमला कर दे, तो बैग में मौजूद पेन या पिन भी एक हथियार बन सकता है। इन तकनीकों का नियमित अभ्यास करने की अपील की। वुमेन पावर लाइन 1090, महिला हेल्प डेस्क 181, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 और डायल 112 के प्रयोग के बारे में जागरूक किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. शकुंतला, श्वेता सेंगर, निर्मल, चेष्ठा दीक्षित, नेहा सिंह, कल्पना निगम, साक्षी दीक्षित, खुशी सिंह, संघमित्रा, बीनेश, अजय वीर सिंह और भरत कुमार मौजूद रहे।

इगलास। अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले इगलास सीएचसी में रक्तदान शिविर का आयोजन हुआ। शिविर में 28 लोगों ने रक्तदान कर लोगों को जागरूक किया। शिविर का शुभारंभ अधीक्षक डॉ. ज्योति शर्मा व सीएचसी बेसवां के अधीक्षक डॉ. मनोज चतुर्वेदी ने किया। उन्होंने कहा कि अमर उजाला फाउंडेशन की पहल सराहनीय है। कस्बे के डॉक्टर, पुलिस कर्मियों के साथ अन्य लोगों ने रक्तदान किया। रक्तदान करने वाले गौरव शर्मा, देवराज, अभिषेक, योगेंद्र नगाइच, मोहित बंसल, संतोष अग्रवाल, सोनू, प्रवीण प्रकाश गौड़, गोपाल कृष्ण, डॉ. दुष्यंत कुमार, डॉ. राहुल गुप्ता, शिवप्रकाश गौड़, लव कुमार चतुर्वेदी, चंद्र प्रकाश, राजकिशोर उपाध्याय, ललित कुमार, डॉ. बहादुर सिंह, अर्जुन, डॉ. मनोज चतुर्वेदी, विशाल उपाध्याय, विक्रमजीत, भारती सक्सेना, व्यवसायी प्रमोद अग्रवाल, तारावती अग्रवाल व अन्य थे। शिविर में रक्त संग्रह के लिए मलखान सिंह से डॉ. नूरा, अक्षय कुमार सेंगर, शुभम, प्रीति, अरविंद, नितिन व प्रीतम शामिल रहे।

सहपऊ। गांव समदपुर के आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला फाउंडेशन के बैनर तले स्वास्थ्य परीक्षण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें 112 बच्चों की सेहत जांची गई। बच्चों की उम्र एवं लंबाई के अनुसार वजन, आंख, नाक-कान, गला, हृदय की धड़कन एवं पल्स रेट की जांच की गई। सभी बच्चे स्वस्थ मिले। इस दौरान डॉ. अवधेश कुमार, डॉ. राजेश, डॉ. आशा मितरा, डॉ. नीलम, रजनी, आंगनबाड़ी केंद्र से मधुर, विवेक एवं सुमन मौजूद रहीं।

चंडीगढ़। महिला क्रिकेट विश्व कप की गूंज के बीच चंडीगढ़ की युवा महिला क्रिकेटरों में भी उत्साह चरम पर है। नेट्स पर पसीना बहा रही शहर की बेटियों की आंखों में अब एक ही सपना है-टीम इंडिया की नीली जर्सी। इस सपने को नई उड़ान दी है शहर की बेटी और भारतीय टीम की तेज गेंदबाज नंदिनी शर्मा ने, जिनकी सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए मिसाल बन गई है। क्रिकेट में बेटियां खूब चौके-छक्के मार रही हैं। हालांकि इन सपनों के साथ एक टीस भी जुड़ी है। खिलाड़ियों का कहना था कि यूटी क्रिकेट एसोसिएशन बनने के बाद सुविधाओं में सुधार जरूर हुआ है लेकिन अभी भी लड़कियों को लड़कों के बराबर अवसर और संसाधन नहीं मिल पा रहे हैं। जहां लड़कों को बेहतर स्टेडियम और आधुनिक सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियां आज भी सीमित संसाधनों के बीच अपनी मंजिल तलाशने को मजबूर हैं। अमर उजाला अपराजिता कार्यक्रम में सेक्टर-9 में जुटीं चंडीगढ़ की वरिष्ठ और उभरती महिला क्रिकेटरों ने अपने अनुभव साझा किए। महिला क्रिकेटरों ने कहा कि अवसर और सुविधाएं बराबर मिलें तो वे साबित कर देंगी कि प्रतिभा किसी से कम नहीं है, बस उसे निखारने के लिए सही मंच की जरूरत है। सीपीएल में मंच न मिलने का मलाल युवा खिलाड़ियों ने सबसे ज्यादा निराशा चंडीगढ़ प्रीमियर लीग (सीपीएल) में महिला वर्ग को अपेक्षित मंच नहीं मिलने पर जताई। उनका कहना था कि चार टीमों वाली यह लीग महिला क्रिकेट के लिए बड़ा अवसर बन सकती थी। इससे खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी मैच मिलते और नई प्रतिभाओं को पहचान बनाने का मौका मिलता। लड़कियों को सीमित विकल्पों में करना पड़ रहा अभ्यास इशाना चड्ढा और प्रियंका ने कहा कि जहां लड़कों को अभ्यास के लिए बेहतर स्टेडियम और सुविधाएं मिलती हैं, वहीं लड़कियों को सीमित विकल्पों में अभ्यास करना पड़ता है। ट्विंकल पाठक, यशिका साहनी और इशाना ने मांग की कि महिला खिलाड़ियों को भी अच्छे और समतल मैदान उपलब्ध कराए जाएं ताकि चोट का खतरा कम हो और प्रदर्शन बेहतर हो सके। उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से ही अगली नंदिनी शर्मा निकलेंगी। नंदिनी की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा अंडर-15 और अंडर-17 खिलाड़ी अदिति श्योराण ने कहा कि नंदिनी शर्मा जैसी खिलाड़ियों की सफलता युवा क्रिकेटरों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इससे यह भरोसा बढ़ता है कि चंडीगढ़ से भी राष्ट्रीय टीम तक पहुंचा जा सकता है। वहीं अंडर-19 खिलाड़ी मानवी का कहना है कि प्रतिभा को निखारने के लिए सुविधाओं के साथ-साथ नियमित और अधिक प्रतिस्पर्धी मैचों का आयोजन भी जरूरी है। युवा क्रिकेटरों ने कहा है कि अगर उन्हें बेहतर मैदान, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त मैच मिलें तो चंडीगढ़ से भविष्य में और भी नंदिनी शर्मा निकल सकती हैं। विश्व कप के माहौल ने इन बेटियों के सपनों को नई उड़ान दी है, अब जरूरत उन सपनों को साकार करने के लिए मजबूत मंच और अवसर देने की है। सोनाक्षी और लावन्या जैसी युवा खिलाड़ियों ने भी ट्रायल और बुनियादी सुविधाओं को लेकर अपनी राय रखी।