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एक अजूबा से मिला कुछ अलग करने का जज्बा

  • calendar_month 10,MAY 2019
एक अजूबा से मिला कुछ अलग करने का जज्बा

अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति की ओर से बाल फिल्म महोत्सव के तहत दिखाई जा रही बाल फिल्मों के क्रम में बृहस्पतिवार, 10 मई, 2019 को नोएडा के सेक्टर- 50, ई-ब्लॉक स्थित सामुदायिक केंद्र में आर्थिक रूप से कमजोर, लेकिन प्रतिभावान बच्चों के लिए चल रहे निःशुल्क ट्यूशन सेंटर में बच्चों को ‘एक अजूबा’ नामक बाल फिल्म दिखाई गई। इस दौरान सेंटर में अध्ययनरत अस्सी से अधिक छात्र-छात्राओं ने फिल्म का लुत्फ उठाया, साथ ही सेंटर के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने भी फिल्म का आनंद लिया।

75 मिनट की बाल फिल्म देख बच्चों ने कहा कि एक अजूबा से हमें एक नई सीख मिली कि मेहनत-लगन से ही मुकाम मिल सकता है। फिल्म की कहानी ने अंधविश्वास पर विश्वास न रखने की सीख दी। फिल्म में रतन और चित्रा का किरदार बच्चों को बहुत पसंद आया। फिल्म में अमरीश पुरी का किरदार बच्चों के मन में बसे भूत-प्रेतों के डर को भगाता है, जो बच्चों को अच्छी लगी।  

आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष विमल शर्मा ने बाल फिल्म महोत्सव के आयोजन की सराहना की। बैंक से सेवानिवृत्त वी.पी. गुप्ता द्वारा गरीब बच्चों के लिए संचालित निःशुल्क ट्यूशन सेंटर में सोसाइटी के लोग भी अपनी सेवाएँ देते है। कार्यक्रम में आर.के. तिहारा, मधुलिका गोस्वामी, रेनू धीमन, अभिनय राणा, सुधा, वृंदा, वैशाली व पंकज तोमर आदि मौजूद रहे।

फिल्म अच्छी रही और इससे बच्चों को ज्ञानवर्धक बातें सीखने और देखने को मिली। इस तरह की फिल्मों से बच्चों को मनोरंजन के साथ संस्कार भी मिलता है। - राजेंद्र कुमार, शिक्षक

फिल्म देख बच्चों को यह प्रेरणा मिली कि अंध विश्वास से दूर रहकर आत्म विश्वास के साथ जीना चाहिए। - रेनू धीमन, शिक्षिका

एक अजूबा देखकर सीख मिली की अंधविश्वास से दूर रहकर आत्मविश्वास के साथ जिंदगी को जीना चाहिए। - नेहा, छात्रा

बाल फिल्म एक अजूबा ने सीख दिया कि मेहनत-लगन से ही मुकाम मिल सकता है। मन में कुछ अलग करने का जुनून पैदा हो गया।– दीपांजलि, छात्रा

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