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मथुरा में शिक्षकों के साथ अन्य लोग भी बने महादानी।

  • calendar_month 28,JAN 2015
मथुरा में शिक्षकों के साथ अन्य लोग भी बने महादानी।

मथुरा। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में ब्लड के नेगेटिव ग्रुप की कमी की सूचना के बाद मंगलवार को शिक्षकों के साथ अन्य रक्तदाताओं में रक्तदान करने की होड़ लग गई। महादान के उत्साह के साथ 54 लोग महर्षि दयानंद अस्पताल पहुंचे। यहां ब्लड बैंक में आवश्यकता के अनुरूप 16 लोगों को रक्तदान का अवसर मिला। शेष को ब्लड ऑन कॉल के जरिए मौका मिलेगा। अमर उजाला उजाला फाउंडेशन के बैनर तले प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा आयोजित इस शिविर में सुबह से ही रक्तदाताओं के आने का क्रम शुरू हो गया था। शिविर का शुभारंभ मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. बीएम सिंह और प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष यशवीर राघव, मंत्री आलोक उपाध्याय ने किया।
 
सीएमएस डा. सिंह ने बताया कि जो ब्लड हमारे पास मौजूद है हमने उन ग्रुप के रक्तदाताओं का रजिस्ट्रेशन कर कर लिया है। जिससे जरूरत पर रक्तदाता को बुलाकर मरीज को रक्त उपलब्ध कराया जा सके। इस अवसर पर ब्लड बैंक की काउंसलर सुशीला शर्मा, तकनीशियन हेमंत रावत और बिजेंद्र सिसौदिया, पवन गौतम, हरेंद्र कुमार आदि मौजूद थे। 
 
शिविर में राजेंद्र सिंह, कृष्णकांत भारद्वाज, पुष्पेंद्र सिंह, तनु शर्मा, दुष्यंत पांडेय, अजय शर्मा, राजकुमार सिंह, देवी चौधरी, विशाल पचौरी, राजीव रावत, रूप किशोर शर्मा, संजय कुमार, लोकेश चौधरी, वीरेंद्र सिंह, आकाश पाल और पूनम गुप्ता ने किया महादान।
 
रक्तदान शिविर के बारे में पढ़ा तो सीधे ब्लड बैंक पहुंचा। रक्त जांच के बाद ब्लड बैंक में ऑन कॉल रक्तदान के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है। हम रक्तदान के लिए हर समय तैयार हैं। -उमेश मचेरिया, होटल कारोबारी, मथुरा
 
पहली बार रक्तदान के बाद अजीब सी खुशी मिल रही है। हमारे रक्त से लोगों की जिंदगी बच सकती है इससे बेहतर और क्या हो सकता है। -अजय शर्मा, शिक्षक मांट, मथुरा
 
ब्लड बैंक में रक्त की कमी सुन टैंटीगांव से पत्नी सहित रक्तदान करने पहुंचे संजय कुमार बोले रक्तदान के बाद बहुत अच्छा लगता है। युवाओं को आगे आना चाहिए।
टैंटीगांव से पति के साथ आईं भावना वार्ष्णेय बोली रक्तदान से सेहत और बेहतर हो जाती है। उन्होंने बताया कि वह ऑन कॉल पर पहले भी वो रक्तदान कर चुकी है।
मथुरा के विशाल पचौरी बोले कि रक्त के दान से चार लोगों की जिंदगी बचती है। ये बात सुखद अहसास देती है। हम संकल्प लें कि रक्त की कमी से किसी की जिंदगी न जाए। 
 
मैंने पहले भी रक्तदान किया है। रक्त की एक यूनिट से चार लोगों की जिंदगी बचा सकती है। इस बात का अनुभव सुखद अहसास कराता है। -केके भारद्वाज, शिक्षक
 
अमर उजाला की पहल सराहनीय है। शिक्षक संघ ने तय किया है कि वो रक्तदान का सिलसिला आगे भी जारी रखेंगे। -पुष्पेंद्र चौधरी, प्रचार मंत्री, शिक्षक संघ

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